राष्ट्रीय | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | 13 मई 2026
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने CBI डायरेक्टर चयन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही तथा विपक्ष के नेता की संवैधानिक भूमिका को नजरअंदाज किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि वह “पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया” का हिस्सा बनकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से समझौता नहीं कर सकते।
उन्होंने अपने बयान में कहा, “मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI डायरेक्टर चयन प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है। मैं किसी पक्षपातपूर्ण अभ्यास में शामिल होकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं छोड़ सकता। विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैम्प नहीं है।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चयन समिति को जरूरी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं। उन्होंने कहा कि बार-बार लिखित मांग के बावजूद उन्हें उम्मीदवारों की self-appraisal reports और 360-degree evaluation reports नहीं दी गईं।
पत्र में राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें समिति की बैठक के दौरान पहली बार 69 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड देखने को कहा गया, जबकि विस्तृत समीक्षा के लिए पर्याप्त समय और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने इसे चयन प्रक्रिया का “मजाक” बताते हुए कहा कि इससे यह सुनिश्चित किया गया कि सरकार का पहले से तय उम्मीदवार ही चुना जाए।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार CBI जैसी प्रमुख जांच एजेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करती रही है। उन्होंने कहा कि इसी संस्थागत दखल को रोकने के लिए चयन समिति में विपक्ष के नेता को शामिल किया गया था, लेकिन सरकार ने उनकी भूमिका को “औपचारिकता” तक सीमित कर दिया।
अपने पत्र में राहुल गांधी ने लिखा कि उन्होंने पहले भी 5 मई 2025 की बैठक में अपना विरोध दर्ज कराया था और 21 अक्टूबर 2025 को चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के सुझाव भी दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और पारदर्शिता से जोड़ते हुए बीजेपी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विपक्ष की सार्थक भागीदारी जरूरी है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन CBI डायरेक्टर चयन प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।




