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कुवैत : ईरान ने चीन समर्थित पोर्ट पर हमले की कोशिश की

अंतरराष्ट्रीय | सूफियान बिन फरहान | ABC NATIONAL NEWS | दुबई/ दोहा | 13 मई 2026

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। कुवैत ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े लड़ाकों ने इस महीने की शुरुआत में कुवैत के एक अहम द्वीप में घुसपैठ कर हमला करने की कोशिश की। यह वही इलाका है जहां चीन की मदद से एक बड़ा रणनीतिक बंदरगाह बनाया जा रहा है। कुवैत सरकार के मुताबिक, 1 मई को ईरान समर्थित एक विशेष टीम ने फारस की खाड़ी में स्थित बुबियान द्वीप में घुसने की कोशिश की। कुवैत का आरोप है कि इस टीम का मकसद “शत्रुतापूर्ण कार्रवाई” करना था। हालांकि सुरक्षा बलों ने समय रहते कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो हमलावर फरार होने में सफल रहे। इस दौरान कुवैती सुरक्षा बल का एक अधिकारी घायल भी हुआ। सबसे बड़ी बात यह है कि बुबियान द्वीप पर चीन के सहयोग से “मुबारक अल कबीर पोर्ट” का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative यानी BRI का हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में इस हमले की कोशिश ने पूरे क्षेत्र में नई भू-राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।

कुवैत ने आरोप लगाया है कि यह सिर्फ सीमा घुसपैठ का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को अस्थिर करने की साजिश भी हो सकती है। हालांकि ईरान ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन यात्रा पर रवाना होने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होनी है। माना जा रहा है कि ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ऊर्जा आपूर्ति इस बैठक के मुख्य मुद्दे होंगे।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। अमेरिका पहले ही ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी बनाए हुए है, जबकि ईरान इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत दिखा रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच खाड़ी देशों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इसी बीच अमेरिकी राजदूत ने खुलासा किया है कि इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात में Iron Dome एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कर्मियों की तैनाती की है, ताकि युद्ध की स्थिति में UAE की रक्षा की जा सके। इसे खाड़ी क्षेत्र में इजरायल की पहली सार्वजनिक सैन्य तैनाती माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि कुवैत का यह आरोप केवल एक सुरक्षा घटना नहीं बल्कि चीन, अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक टकराहट का संकेत है। चीन लंबे समय से ईरानी तेल खरीदता रहा है और होर्मुज संकट से उसकी अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में चीन समर्थित पोर्ट पर कथित हमले की कोशिश बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।

मध्य पूर्व में पहले से जारी संघर्ष, तेल संकट और समुद्री तनाव के बीच यह नया घटनाक्रम पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह मामला फिर से बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा या कूटनीतिक बातचीत के जरिए हालात को संभाल लिया जाएगा।

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