अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग / वॉशिंगटन | 13 मई 2026
चीन ने एक बार फिर अमेरिका के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक तथा व्यापारिक संबंध “पारस्परिक रूप से लाभकारी” हैं और दोनों देशों को वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए मिलकर काम करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि चीन-अमेरिका आर्थिक संबंध किसी एक देश के फायदे के लिए नहीं बल्कि दोनों देशों और पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
गुओ ने कहा कि दोनों पक्षों को अपने राष्ट्रपतियों के बीच बनी साझा सहमतियों को लागू करने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन और अमेरिका के बीच स्थिर व्यापारिक सहयोग वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के लिए बेहद जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर पूरी दुनिया की नजर बीजिंग और वॉशिंगटन पर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध, टेक्नोलॉजी प्रतिबंध, ताइवान मुद्दा और ईरान युद्ध जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान अमेरिका के साथ टकराव कम करने और आर्थिक मोर्चे पर रिश्तों को स्थिर रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच टैरिफ, सेमीकंडक्टर तकनीक, AI और दुर्लभ खनिजों को लेकर लगातार तनाव बढ़ा है।
चीन ने यह भी संकेत दिया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग टूटने का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर मौजूदा Middle East संकट, तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के बीच चीन-अमेरिका रिश्ते और ज्यादा अहम हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बीजिंग इस समय खुद को “स्थिर आर्थिक शक्ति” के रूप में पेश करना चाहता है, जबकि अमेरिका लगातार चीन की टेक्नोलॉजी और व्यापारिक ताकत को सीमित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
इधर चीन के सरकारी मीडिया और अधिकारियों की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि व्यापार युद्ध और आर्थिक टकराव किसी के हित में नहीं हैं। चीन का कहना है कि सहयोग और संवाद ही दोनों देशों के लिए बेहतर रास्ता है।
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और चीन के बीच होने वाली आगामी उच्चस्तरीय बैठकों पर टिकी है, क्योंकि इन दोनों महाशक्तियों के रिश्ते सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।




