शिक्षा | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 मई 2026
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 आखिरकार पेपर लीक और भारी अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दी गई है। लाखों छात्रों की महीनों की मेहनत, मानसिक तनाव और सपनों पर एक झटके में पानी फिर गया। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी है, जबकि National Testing Agency यानी NTA अब देशभर के छात्रों के गुस्से और सवालों के घेरे में आ गई है।
करीब 23 लाख से ज्यादा छात्रों ने इस साल NEET UG परीक्षा दी थी। लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए “गेस पेपर” और कथित लीक दस्तावेजों ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। जांच में सामने आया कि वायरल पेपर के 100 से ज्यादा सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे। इसके बाद राजस्थान, बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हड़कंप मच गया।
राजस्थान पुलिस की SOG ने शुरुआती जांच में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। मामला बढ़ता देख केंद्र सरकार ने तुरंत CBI जांच का ऐलान कर दिया। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को शक है कि यह सिर्फ पेपर लीक नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के संगठित परीक्षा माफिया का खेल हो सकता है। अब CBI डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और कोचिंग नेटवर्क की जांच में जुट गई है।
NEET रद्द होने की खबर सामने आते ही देशभर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। दिल्ली, पटना, जयपुर, कोटा और लखनऊ समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का कहना है कि उन्होंने दिन-रात मेहनत कर परीक्षा दी थी, लेकिन सिस्टम की नाकामी का खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने भी सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी परीक्षा बार-बार विवादों में क्यों फंस रही है।
सोशल मीडिया पर #NEETCancelled, #NTAFail और #JusticeForStudents जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। हजारों छात्रों ने वीडियो पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ छात्रों ने कहा कि वे पिछले दो साल से सिर्फ NEET की तैयारी कर रहे थे और अब दोबारा परीक्षा का दबाव मानसिक रूप से तोड़ देने वाला है।
NTA ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि परीक्षा की “निष्पक्षता और पारदर्शिता” बनाए रखने के लिए NEET UG 2026 को रद्द किया गया है। एजेंसी के मुताबिक छात्रों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और पुराना रजिस्ट्रेशन मान्य रहेगा। नई परीक्षा तिथि अगले 7 से 10 दिनों में घोषित की जा सकती है। लेकिन छात्रों का सवाल है कि जब पेपर सुरक्षित ही नहीं रख पाए, तो दोबारा परीक्षा कितनी सुरक्षित होगी?
विपक्ष ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को जोरदार तरीके से घेर लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “देश का शिक्षा तंत्र पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।” विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन छात्रों के भविष्य की सुरक्षा तक नहीं कर पा रही।
कई विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश की लगभग हर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा किसी न किसी विवाद में फंसी है — चाहे वह NEET हो, CUET हो, UGC-NET हो या भर्ती परीक्षाएं। बार-बार पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियां यह साबित कर रही हैं कि देश की परीक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में परीक्षा माफिया अब एक बड़ा संगठित नेटवर्क बन चुका है। करोड़ों रुपये लेकर पेपर लीक कराने, फर्जी उम्मीदवार बैठाने और डिजिटल हैकिंग तक के आरोप सामने आते रहे हैं। कोटा और पटना जैसे शिक्षा हब में भी जांच एजेंसियां कई कोचिंग और संदिग्ध एजेंटों पर नजर रख रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य आखिर कब तक ऐसे ही दांव पर लगता रहेगा? हर साल लाखों छात्र अपनी जिंदगी के सबसे अहम साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा देते हैं। लेकिन जब परीक्षा ही सुरक्षित न हो, तो मेहनत और मेरिट का क्या मतलब रह जाता है?
फिलहाल पूरे देश की नजर CBI जांच और री-एग्जाम की नई तारीख पर टिकी हुई है। लेकिन इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत की परीक्षा व्यवस्था को सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि पूरी तरह से रीसेट करने की जरूरत है।




