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“भारत के कंटीले तारों से बांग्लादेश नहीं डरेगा”, शिवेंदु सरकार के बॉर्डर फैसले पर ढाका की तीखी प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता / ढाका | 12 मई 2026

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा को लेकर सियासी और कूटनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री शिवेंदु अधिकारी सरकार द्वारा सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए BSF को जमीन सौंपने के फैसले के बाद बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी और विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने साफ शब्दों में कहा है कि “बांग्लादेश भारत के कंटीले तारों से डरने वाला नहीं है।”

ढाका में मीडिया से बातचीत के दौरान हुमायूं कबीर ने कहा कि बांग्लादेश अब पहले जैसा नहीं रहा और सीमा विवादों पर उसकी सरकार का रुख पहले की तुलना में ज्यादा सख्त होगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अपनी संप्रभुता और सीमा हितों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए 45 दिनों के भीतर BSF को जमीन हस्तांतरित की जाएगी, ताकि सीमा पर फेंसिंग का काम तेजी से पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री शिवेंदु अधिकारी ने इसे राज्य और देश की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम बताया था।

इसी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि चुनावी माहौल में नेता कई तरह के बयान देते हैं, लेकिन शासन चलाना अलग बात होती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बांग्लादेश भारत की आंतरिक राजनीति में दखल नहीं देना चाहता, लेकिन जहां जरूरत होगी वहां ढाका अपनी बात मजबूती से रखेगा।

कबीर ने यह भी कहा कि “बांग्लादेश के लोग और यहां की सरकार कंटीले तारों की बाड़ से डरती नहीं है।” उन्होंने दावा किया कि सीमा को लेकर बांग्लादेश की भी अपनी रणनीति और योजनाएं हैं। उनके इस बयान को भारत के लिए अप्रत्यक्ष चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

बांग्लादेशी सलाहकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शेख हसीना को भारत में शरण मिली हुई है और भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी जमीन का इस्तेमाल बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के लिए न हो। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के संबंध पहले से संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सीमा सुरक्षा और घुसपैठ का मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है। बीजेपी लंबे समय से अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाती रही है। अब शिवेंदु अधिकारी सरकार के फैसलों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि राज्य में सीमा प्रबंधन को लेकर सख्त नीति अपनाई जाएगी।

दूसरी ओर बांग्लादेश में भी नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच राष्ट्रवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दे तेजी से उभर रहे हैं। यही कारण है कि ढाका अब पहले की तुलना में ज्यादा आक्रामक बयानबाजी करता दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद जारी रहना बेहद जरूरी होगा, वरना सीमा विवाद और राजनीतिक बयानबाजी तनाव बढ़ा सकती है।

हालांकि हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है और दोनों देशों के नेतृत्व को द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद रिश्तों को बेहतर बनाने की संभावना अभी भी मौजूद है।

फिलहाल सीमा फेंसिंग को लेकर शुरू हुआ यह विवाद दोनों देशों के बीच नई बहस बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत और बांग्लादेश इस संवेदनशील मुद्दे को कूटनीतिक बातचीत से संभालते हैं या बयानबाजी और राजनीतिक तनाव और बढ़ता है।

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