राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 12 मई 2026
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सत्ता संभालने के बाद अपना अब तक का सबसे बड़ा सामाजिक फैसला लेते हुए राज्य में मंदिरों, स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के आसपास चल रही 717 शराब दुकानों को बंद करने का आदेश दे दिया है। TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) सरकार के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने और सामाजिक माहौल सुधारने के लिए यह फैसला जरूरी था।
मुख्यमंत्री विजय ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी सरकार केवल सत्ता चलाने नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने आई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन TASMAC शराब दुकानों के आसपास मंदिर, मस्जिद, चर्च, स्कूल, कॉलेज या अन्य सार्वजनिक संस्थान मौजूद हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बंद किया जाए। सरकार ने इसके लिए विस्तृत सूची तैयार कर ली है और चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई शुरू होने वाली है।
तमिलनाडु में TASMAC के जरिए शराब बिक्री लंबे समय से बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही है। राज्य में हजारों शराब दुकानें सरकार के नियंत्रण में चलती हैं और इससे सरकार को हर साल भारी राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन दूसरी ओर महिलाओं, सामाजिक संगठनों और कई धार्मिक संस्थाओं ने लगातार आरोप लगाया कि स्कूलों और मंदिरों के पास शराब की दुकानें होने से सामाजिक वातावरण खराब हो रहा है और युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है।
TVK सरकार के इस फैसले के बाद कई इलाकों में लोगों ने खुशी जाहिर की है। खासकर महिलाओं और अभिभावकों के बीच इस कदम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर विजय समर्थक इसे “जनता के लिए लिया गया साहसिक फैसला” बता रहे हैं। कई जगहों पर TVK कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत भी किया।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिन 717 दुकानों को बंद किया जा रहा है, उनमें बड़ी संख्या ऐसी दुकानों की है जिनके खिलाफ पिछले कई वर्षों से स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। कई जगहों पर ग्रामीणों और महिलाओं ने सड़क पर उतरकर आंदोलन भी किए थे। लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों पर आरोप लगता रहा कि उन्होंने राजस्व के कारण इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया।
मुख्यमंत्री विजय ने अपने अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि सरकार केवल आर्थिक लाभ के आधार पर फैसले नहीं करेगी, बल्कि सामाजिक प्रभाव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में तमिलनाडु की शराब नीति में और बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
हालांकि विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए हैं। AIADMK और कुछ अन्य दलों का कहना है कि शराब दुकानों को बंद करने से राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ेगा और सरकार को इसका आर्थिक रोडमैप भी स्पष्ट करना चाहिए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि केवल कुछ दुकानों को बंद कर सरकार “राजनीतिक संदेश” देने की कोशिश कर रही है, जबकि पूरे सिस्टम में सुधार की जरूरत है।
इसके जवाब में TVK नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और सरकार समाजहित में कठिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो राजस्व के लिए कई आसान रास्ते चुन सकती थी, लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने सामाजिक सुधार को प्राथमिकता दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय अपनी राजनीति को पारंपरिक द्रविड़ मॉडल से अलग दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। फिल्मों में सामाजिक मुद्दों को उठाने वाले विजय अब सत्ता में भी उसी छवि को मजबूत करना चाहते हैं। यही कारण है कि उनकी सरकार शुरुआत से ही जनहित और प्रतीकात्मक बड़े फैसलों पर फोकस कर रही है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर यह अभियान सफल रहा, तो तमिलनाडु में शराब नीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज हो सकती है। कई राज्यों में पहले भी शराबबंदी या सीमित नियंत्रण को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है, लेकिन तमिलनाडु जैसे बड़े राजस्व वाले राज्य में इतनी बड़ी संख्या में दुकानों को बंद करना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल पूरे राज्य में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है। लोग अब यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार केवल 717 दुकानों तक सीमित रहती है या आने वाले समय में शराब नीति पर और भी बड़े फैसले सामने आते हैं। इतना तय है कि मुख्यमंत्री विजय ने सत्ता में आते ही यह संकेत दे दिया है कि उनकी सरकार फैसले लेने से पीछे हटने वाली नहीं है।




