अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन / तेहरान | 12 मई 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के जवाबी शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के और लंबा खिंचने की आशंका तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव अब भी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
करीब 10 सप्ताह से जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष को रोकने के लिए अमेरिका की ओर से एक शांति प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन ईरान ने इसके जवाब में कई कड़ी शर्तें रख दीं। इनमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा, तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां खत्म करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक स्थिति को स्वीकार करने जैसी मांगें शामिल थीं। डोनाल्ड ट्रंप ने इन मांगों को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए तत्काल खारिज कर दिया।
ट्रंप के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी हलचल देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई और बाजार में डर बढ़ गया कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहा तो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा लाइफलाइन माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज संकट अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका असर एशिया, यूरोप और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देशों जैसे बड़े तेल आयातक देशों में पहले से ही ईंधन कीमतों को लेकर चिंता बढ़ चुकी है। कई देशों में महंगाई और परिवहन लागत में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच ईरान ने भी अमेरिका पर “अहंकारी रवैया” अपनाने का आरोप लगाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाता, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका किसी भी ऐसी शर्त को स्वीकार नहीं करेगा जिससे ईरान को रणनीतिक बढ़त मिले।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है। बीमा कंपनियों ने भी इस रूट को “उच्च जोखिम क्षेत्र” घोषित कर दिया है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है, जबकि निवेशक सोने और डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। कई देशों की सरकारें अब वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक तेल भंडार के इस्तेमाल की तैयारी में जुट गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह सख्त रुख घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। अमेरिका में पहले से ही युद्ध और बढ़ती महंगाई को लेकर जनता के बीच नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन ईरान के सामने कमजोर दिखने से बचना चाहता है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि लगातार टकराव की नीति दुनिया को बड़े आर्थिक संकट की ओर धकेल सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान दोबारा बातचीत की मेज पर लौटेंगे या फिर यह संघर्ष और गहराकर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा।




