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ईंधन संकट पर PM मोदी की बड़ी अपील: वर्क फ्रॉम होम अपनाएं, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाएं

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 10 मई 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ऊर्जा बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की अपील की है। तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक युद्ध और लगातार बिगड़ते हालात का असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो महीनों से भारत के पड़ोसी क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार जनता पर बोझ कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन संकट के कारण चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश सामूहिक रूप से ऊर्जा बचत का संकल्प ले। उन्होंने कहा कि जहां मेट्रो की सुविधा उपलब्ध है, वहां लोग निजी वाहनों की जगह मेट्रो का इस्तेमाल करें। अगर कार से यात्रा जरूरी हो तो कार पूलिंग को बढ़ावा दें ताकि ईंधन की खपत कम हो सके।

उन्होंने माल ढुलाई के लिए रेलवे के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया और कहा कि इलेक्ट्रिक रेलवे नेटवर्क के विस्तार से पेट्रोल-डीजल की निर्भरता घटाई जा सकती है। पीएम मोदी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की भी अपील की।

प्रधानमंत्री ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाएं तेजी से विकसित हुई थीं और लोगों ने उन्हें अपनाया भी था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन व्यवस्थाओं को फिर से प्राथमिकता देना देशहित में होगा।

पीएम मोदी ने कहा, “वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग्स को फिर से बढ़ावा देना होगा। इससे न सिर्फ ईंधन बचेगा, बल्कि विदेशी मुद्रा पर दबाव भी कम होगा।”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को तेल और सोने के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में देशवासियों को कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम करने पर भी विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “एक समय था जब देश संकट में होता था तो लोग सोना दान कर देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर हम एक साल तक सोने की खरीद कम कर दें तो यह भी देशभक्ति का बड़ा उदाहरण होगा।”

प्रधानमंत्री के इस बयान को मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव के बीच एक बड़े जनसंदेश के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़े पैमाने पर लोग सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल कार्य प्रणाली और ऊर्जा बचत के उपाय अपनाते हैं, तो इससे देश की आयात निर्भरता और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

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