अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | 10 मई 2026
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए मिडिल ईस्ट और चीन में मौजूद कई कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक ये कंपनियां और लोग ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम में मदद कर रहे थे। अमेरिका का दावा है कि इन नेटवर्क्स के जरिए ईरान को तकनीक, उपकरण और लॉजिस्टिक सहायता पहुंचाई जा रही थी, जिससे उसका सैन्य ढांचा लगातार मजबूत हो रहा था।
अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि इस कार्रवाई के तहत ईरान, चीन, बेलारूस और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े 11 संस्थानों और 3 व्यक्तियों को निशाने पर लिया गया है। वॉशिंगटन का कहना है कि ये सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में शामिल थे।
अमेरिका ने खास तौर पर कुछ चीनी संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये संस्थाएं ईरान को सैटेलाइट इमेजरी और तकनीकी डेटा उपलब्ध करा रही थीं, जिसका इस्तेमाल युद्ध और सैन्य रणनीति तैयार करने में किया जा रहा था। अमेरिकी प्रशासन इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा मान रहा है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है। हॉर्मुज स्ट्रेट में जारी संघर्ष, तेल टैंकरों पर हमले और समुद्री नाकेबंदी के बीच वॉशिंगटन लगातार तेहरान पर दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को नहीं माना तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है।
उधर ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को “आर्थिक युद्ध” करार दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका लगातार दूसरे देशों और कंपनियों को डराकर ईरान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि उनका मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम पूरी तरह “रक्षात्मक” है और किसी भी बाहरी दबाव में उसे रोका नहीं जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब सिर्फ ईरान को नहीं, बल्कि उसके अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क को भी तोड़ना चाहता है। चीन और खाड़ी देशों से जुड़े संस्थानों पर कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इससे आने वाले दिनों में अमेरिका-चीन संबंधों में भी नया तनाव पैदा हो सकता है, क्योंकि बीजिंग पहले ही ईरान पर अमेरिकी दबाव का कई बार विरोध कर चुका है।
इस बीच वॉशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि वह अभी कूटनीतिक विकल्प पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसे ईरान के जवाब का इंतजार है और अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि मौजूदा हालात में मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं माना जा रहा।




