राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 9 मई 2026
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी ड्रामा लगातार गहराता जा रहा है। TVK प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर पूरे दिन चर्चाएं तेज रहीं, लेकिन देर रात तक राजभवन की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होने से नए राजनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार विजय ने शुक्रवार रात करीब 8 बजे CPI(M) दफ्तर पहुंचकर वाम दलों के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और वहां पार्टी नेताओं से अहम मुलाकात की। इसके बाद CPI(M) के राज्य सचिव पी. शन्मुगम ने मीडिया को बताया कि विजय ने उन्हें जानकारी दी है कि वह शनिवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
हालांकि राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल और बढ़ गई जब देर रात तक तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अरलेकर के कार्यालय से शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोई औपचारिक सूचना जारी नहीं हुई। इससे यह अटकलें तेज हो गईं कि सरकार गठन की प्रक्रिया में अभी भी कोई बड़ा पेंच फंसा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक सबसे बड़ी अड़चन VCK के समर्थन को लेकर सामने आई है। बताया जा रहा है कि VCK ने पहले विजय सरकार को समर्थन देने का भरोसा दिया था, लेकिन अब पार्टी नेतृत्व ने कथित तौर पर नई शर्तें रख दी हैं। खबर है कि VCK अपने दो विधायकों के बदले उपमुख्यमंत्री पद, एक कैबिनेट मंत्रालय और विजय द्वारा छोड़ी जाने वाली सीट पर चुनाव लड़ने का अधिकार मांग रही है।
सूत्रों का दावा है कि विजय इन मांगों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। TVK नेतृत्व का मानना है कि सरकार गठन से पहले अत्यधिक राजनीतिक सौदेबाज़ी उनकी “नई राजनीति” की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। इसी वजह से बातचीत अंतिम दौर में जाकर अटक गई है।
इधर VCK ने संकेत दिए हैं कि वह शनिवार को औपचारिक रूप से तय करेगी कि सरकार को समर्थन देना है या नहीं। इस फैसले पर तमिलनाडु की पूरी राजनीतिक तस्वीर टिकी हुई है। अगर VCK पीछे हटती है तो विजय सरकार के लिए बहुमत का गणित और मुश्किल हो सकता है।
मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। सरकार गठन और बहुमत परीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में राज्यपाल की भूमिका और सरकार गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं, जबकि राजभवन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तमिलनाडु में इस वक्त राजनीतिक अनिश्चितता चरम पर है। एक तरफ विजय समर्थक “जनादेश का सम्मान” करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर गठबंधन सहयोगियों की बढ़ती मांगों ने सरकार गठन को मुश्किल बना दिया है। अब सबकी नजर शनिवार सुबह पर टिकी है कि क्या विजय तय समय पर शपथ लेते हैं या फिर तमिलनाडु का यह राजनीतिक संकट और लंबा खिंचता है।




