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तमिलनाडु की राजनीति में नया भूचाल: दिनाकरन बोले- हमारा MLA लापता, TVK पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का आरोप

चेन्नई | ABC NATIONAL NEWS | 9 मई 2026

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक घमासान अब और तेज हो गया है। AMMK प्रमुख टी.टी.वी. दिनाकरन ने अभिनेता-विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक एस. कामराज “लापता” हैं और इसके पीछे TVK की भूमिका हो सकती है।

शुक्रवार रात राज्यपाल आर.एन. अरलेकर से मुलाकात के बाद दिनाकरन ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि तमिलनाडु में खुलेआम “हॉर्स ट्रेडिंग” यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त की राजनीति चल रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र का मजाक बताया और राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

दिनाकरन ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक एस. कामराज ने पुडुचेरी में उनसे मुलाकात की थी और AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने संबंधी ज्ञापन पर उनके हस्ताक्षर भी लिए थे। लेकिन उसके बाद से विधायक से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा, “मैं लगातार फोन कर रहा हूं, लेकिन उनका मोबाइल बंद आ रहा है। हमें आशंका है कि TVK हमारे विधायक को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।”

एस. कामराज ने मन्नारगुड़ी सीट से चुनाव जीता था और उन्होंने DMK तथा TVK दोनों उम्मीदवारों को हराया था। उनकी सीट फिलहाल सरकार गठन के गणित में बेहद अहम मानी जा रही है।

दिनाकरन ने विजय पर सीधा हमला करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने DMK को “बुराई की ताकत” बताया था, लेकिन अब वही विजय DMK के सहयोगी दलों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर सरकार बनने से पहले ही ऐसी राजनीति हो रही है, तो साफ-सुथरी सरकार देने का दावा कैसे किया जा सकता है?”

इस बीच तमिलनाडु में सरकार गठन का संकट और गहरा गया है। TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस और वाम दलों ने समर्थन दिया है, लेकिन कई छोटे दलों का रुख अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

राज्यपाल के पास लगातार राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल पहुंच रहे हैं और चेन्नई में बैठकों का दौर जारी है। AIADMK भी सरकार बनाने की संभावनाएं तलाश रही है, जबकि BJP ने साफ कर दिया है कि वह किसी गठबंधन सरकार का समर्थन नहीं करेगी।

तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह सस्पेंस, रणनीति और नंबर गेम के इर्द-गिर्द घूम रही है। राज्य की जनता की नजरें अब राजभवन और अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई हैं।

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