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बांग्लादेश में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक आयोजनों से गूंजा पूरा राष्ट्र

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ढाका | 9 मई 2026

नोबेल पुरस्कार विजेता कवि, साहित्यकार और दार्शनिक Rabindranath Tagore की 165वीं जयंती पर पूरे बांग्लादेश में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। देशभर में सांस्कृतिक समारोह, कविताओं का पाठ, रवींद्र संगीत, नृत्य प्रस्तुतियां और साहित्यिक चर्चाओं के जरिए गुरुदेव को याद किया गया। बांग्लादेश सरकार ने इस अवसर को “शांति और मानवता के कवि” थीम के साथ राष्ट्रीय स्तर पर मनाया।

बांग्लादेश के संस्कृति मंत्रालय ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका मुख्य समारोह कुश्तिया स्थित Shilaidaha Kuthibari में हुआ। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां टैगोर ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय बिताया था और कई प्रसिद्ध रचनाएं लिखीं। इस दौरान देशभर से साहित्यकार, कलाकार, छात्र और बुद्धिजीवी शामिल हुए।

ढाका में Bangladesh Shilpakala Academy ने चार दिवसीय विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की। यहां रवींद्र संगीत, नाट्य प्रस्तुतियां, चित्र प्रदर्शनी और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। आयोजकों ने कहा कि टैगोर सिर्फ साहित्यकार नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति और मानवता की आवाज हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोरासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। वे 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बने। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में गीतांजलि, गोरा, चोखेर बाली और शेषेर कविता शामिल हैं। उनके गीत “रवींद्र संगीत” आज भी बंगाली संस्कृति की आत्मा माने जाते हैं।

टैगोर की खास बात यह भी है कि उन्होंने भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” और बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार सोनार बांग्ला” लिखा। यही वजह है कि वे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एकता और साझा विरासत के सबसे बड़े प्रतीकों में गिने जाते हैं।

भारत और बांग्लादेश दोनों में इस अवसर पर स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थाओं में विशेष कार्यक्रम हुए। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में “25 बैशाख” के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन बंगाली समाज के लिए सिर्फ एक जयंती नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य और मानवता के उत्सव का प्रतीक बन चुका है।

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