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चीन ने पहली बार माना — भारत के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान को दिया था तकनीकी समर्थन

ABC NATIONAL NEWS | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 8 मई 2026

भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए चार दिन के युद्ध को लेकर चीन ने पहली बार बड़ा खुलासा किया है। चीन ने स्वीकार किया है कि उसने उस दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी। इस खुलासे के बाद दक्षिण एशिया की सुरक्षा और चीन-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने एक इंटरव्यू प्रसारित किया, जिसमें एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के इंजीनियर झांग हेंग ने पाकिस्तान में तकनीकी सहायता देने की बात कही।

झांग हेंग चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े हैं, जो आधुनिक लड़ाकू विमान और ड्रोन तकनीक विकसित करता है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान झांग हेंग ने पाकिस्तान को “ऑन-साइट टेक्निकल सपोर्ट” दिया था। हालांकि चीन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सहायता किस स्तर की थी और इसमें कौन-कौन सी सैन्य प्रणालियां शामिल थीं।

भारत पहले से ही यह आरोप लगाता रहा है कि संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग दिया था। अब चीन की तरफ से आई यह स्वीकारोक्ति भारत की उन आशंकाओं को मजबूत करती दिख रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा होता जा रहा है। पाकिस्तान की वायुसेना में इस्तेमाल होने वाले कई आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन तकनीक चीन से ही आती है। यही वजह है कि किसी भी क्षेत्रीय तनाव में बीजिंग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत लगातार अपनी सीमाओं पर सुरक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आधुनिक तकनीक और सामरिक साझेदारियों पर तेजी से काम किया है।

राजनीतिक और सामरिक जानकारों का कहना है कि चीन का यह बयान सिर्फ एक तकनीकी जानकारी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी हो सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि बीजिंग दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में खुलकर अपनी मौजूदगी दिखाना चाहता है। भारत की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।

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