राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 8 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 15 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया है और अब सुवेंदु अधिकारी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। शुक्रवार को कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद रहे।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक विधायक दल की बैठक में सभी प्रस्ताव सुवेंदु अधिकारी के नाम पर आए। इसके बाद उनके नाम पर मुहर लगा दी गई। सुवेंदु अधिकारी शनिवार 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी चल रही है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के करीब 20 मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं।
चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक विजय दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। यह नतीजा ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर के सबसे बड़े झटकों में माना जा रहा है। खुद ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को “साजिश” बताया था और कहा था कि यह जनता का वास्तविक जनादेश नहीं है। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।
इधर सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार शाम राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। उनके साथ दिलीप घोष, लॉकेट चटर्जी और तपस रॉय समेत भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद थे।
मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार का मंत्र “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” होगा। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, राष्ट्रवाद और बंगाल को फिर से देश की सांस्कृतिक राजधानी बनाने का वादा किया। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं पर अत्याचार से जुड़े मामलों को दोबारा खोला जाएगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस जीत को “ऐतिहासिक” बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में दशकों तक कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों का संकट रहा। शाह ने दावा किया कि “अब घुसपैठ और सीमा पार तस्करी असंभव हो जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में 93 प्रतिशत मतदान हुआ और बूथ कैप्चरिंग का कोई आरोप सामने नहीं आया।
चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पोस्ट-पोल हिंसा की CBI जांच की मांग की है।
बीजेपी की जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने अपने पांच प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन नेताओं पर पार्टी विरोधी बयान देने का आरोप है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ सरकार बदलने की घटना नहीं है, बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति में बड़े बदलाव का संकेत भी है। जिस ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर कभी वामपंथी ताकतों का दबदबा दिखता था और बाद में ममता बनर्जी की रैलियां होती थीं, अब वहीं भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने जा रहा है।
सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है। कभी ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे सुवेंदु ने 2020 में तृणमूल छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। 2021 में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था और अब 2026 में भवानीपुर से भी उन्हें शिकस्त देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए हैं।
बंगाल की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। सवाल सिर्फ सरकार बदलने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या भाजपा बंगाल की राजनीतिक सोच और प्रशासनिक व्यवस्था को भी बदल पाएगी। पूरे देश की नजर अब 9 मई के उस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई है, जब पहली बार बंगाल में भाजपा सरकार सत्ता संभालेगी।




