अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/काठमांडू | 8 मई 2026
भारत ने लिपुलेख पास के जरिए होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर नेपाल की आपत्ति को खारिज कर दिया है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि लिपुलेख मार्ग 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक स्थापित और पारंपरिक रास्ता रहा है और इस मार्ग से दशकों से यात्रा संचालित होती रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा उठाए गए सीमा संबंधी दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का रुख हमेशा स्पष्ट और स्थिर रहा है। उन्होंने कहा कि यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है और भारत पहले भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख चुका है।
भारत ने नेपाल के दावों को “तथ्यों और ऐतिहासिक प्रमाणों से परे” बताते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर एकतरफा और कृत्रिम दावों का विस्तार स्वीकार्य नहीं हो सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा वर्षों से होती रही है और इसका संचालन भारत और चीन के बीच स्थापित व्यवस्थाओं के तहत जारी है।
नेपाल ने हाल ही में इस मार्ग को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह क्षेत्र नेपाल के दावे वाले इलाके में आता है। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई। नेपाल लंबे समय से लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर दावा करता रहा है, जबकि भारत इन इलाकों को अपने प्रशासनिक नियंत्रण वाला हिस्सा मानता है।
भारत ने हालांकि अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह नेपाल के साथ सभी लंबित सीमा मुद्दों को बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत नेपाल के साथ रचनात्मक संवाद और मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के पक्ष में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक और सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि लिपुलेख मार्ग को लेकर दोनों देशों के बीच समय-समय पर राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव सामने आता रहा है।
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद हाल के वर्षों में सीमा विवाद कई बार दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का कारण बना है। फिलहाल भारत ने अपने ताजा बयान से साफ संकेत दिया है कि वह लिपुलेख मार्ग को लेकर अपने पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं करने जा रहा।




