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जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर विवाद: ट्रंप के फैसले से रूस को मिलेगा संदेश? रिपब्लिकन नेताओं ने जताई चिंता

अंतर्राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/बर्लिन | 4 मई 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने के फैसले पर अमेरिका और यूरोप दोनों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने जर्मनी से करीब 5,000 सैनिक हटाने का ऐलान किया है, जबकि खुद ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह कटौती इससे भी ज्यादा हो सकती है। इस फैसले पर अमेरिका के ही दो वरिष्ठ रिपब्लिकन नेताओं—सीनेटर रोजर विकर और प्रतिनिधि माइक रोजर्स—ने खुलकर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने कहा कि जर्मनी जैसे नाटो सहयोगी देश से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करना “गलत संदेश” भेज सकता है, खासकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को।

उन्होंने अपने संयुक्त बयान में कहा कि यूरोप में अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी न सिर्फ नाटो की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह रूस जैसे देशों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश होता है कि पश्चिमी गठबंधन एकजुट है। ऐसे में जल्दबाजी में सैनिकों की वापसी से यह संतुलन बिगड़ सकता है।

इस समय जर्मनी में करीब 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य उपस्थिति है। ऐसे में 5,000 सैनिकों की वापसी को एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी “काफी हद तक घटाने” जा रहा है। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद ज्यादा उठानी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का हालिया बयान भी अहम माना जा रहा है। उन्होंने ईरान के मुद्दे पर अमेरिका की स्थिति को लेकर तीखी टिप्पणी की थी, जिसके बाद वॉशिंगटन में नाराजगी देखी गई। माना जा रहा है कि इसके बाद ही यह फैसला तेजी से आगे बढ़ा।

यूरोप के कई देशों ने भी इस कदम पर चिंता जताई है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इसे “खतरनाक संकेत” बताते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में दरार बढ़ना पूरी ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने हालांकि इसे “संभावित” कदम बताते हुए कहा कि यूरोपीय देशों को अब अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि यूरोप को आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता विकसित करनी चाहिए।

अमेरिकी डेमोक्रेट नेताओं ने भी ट्रंप के फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कदम किसी ठोस राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति पर आधारित नहीं है और इससे रूस को बढ़ावा मिल सकता है।

यह फैसला नाटो गठबंधन के भविष्य पर भी असर डाल सकता है। अगर अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी कम करता है, तो यूरोपीय देशों को अपने रक्षा बजट और सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ाना होगा, लेकिन इसमें समय लगेगा। यह स्पष्ट है कि जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी सिर्फ एक सैन्य फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संकेत है। आने वाले समय में इसका असर अमेरिका-यूरोप संबंधों और रूस के साथ शक्ति संतुलन पर साफ दिखाई दे सकता है।

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