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ईरान के नए शांति प्रस्ताव पर ट्रंप सख्त, बोले—मंजूरी की संभावना कम; हमले का विकल्प अभी भी खुला

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वेस्ट पाम बीच/वॉशिंगटन | 3 मई 2026

वेस्ट पाम बीच। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए साफ कहा है कि इसे स्वीकार किए जाने की संभावना बहुत कम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस प्रस्ताव की समीक्षा करेगा, लेकिन साथ ही ईरान के खिलाफ भविष्य में सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ईरान ने जो प्रस्ताव भेजा है, वह अभी तक स्वीकार्य नहीं लगता क्योंकि “उन्होंने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसकी पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।” उन्होंने संकेत दिया कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो अमेरिका दोबारा हमला करने से पीछे नहीं हटेगा।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो महीने से जारी तनाव के बीच आठ अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बाद भी बातचीत ठप पड़ी हुई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई एक दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही थी।

इस बीच ईरान की सरकारी एजेंसियों के मुताबिक तेहरान ने चौदह बिंदुओं वाला एक नया प्रस्ताव इस्लामाबाद को सौंपा है, जिसमें सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के लिए नई व्यवस्था बनाने की बात कही गई है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

ईरान की तरफ से भी कड़ा रुख सामने आया है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने कहा है कि अमेरिका के साथ संघर्ष फिर से शुरू होने की संभावना है। वहीं उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है कि वह बातचीत का रास्ता अपनाता है या टकराव का।

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि अमेरिका खुद बड़े पैमाने पर परमाणु हथियार रखता है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सवाल उठाता है।

हालात को और जटिल बनाते हुए ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों पर दबाव बढ़ाया है। इसका असर यह हुआ है कि तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में काफी ऊपर पहुंच गई हैं।

इस बीच लेबनान में भी तनाव जारी है, जहां इजरायल लगातार हमले कर रहा है, जबकि हिज़्बुल्लाह भी जवाबी कार्रवाई में जुटा हुआ है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा अस्थिर हो गए हैं।

वहीं ईरान के अंदर आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। महंगाई पचास प्रतिशत के पार पहुंच चुकी है और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अभी तक बचत के सहारे हालात संभाले हुए हैं, लेकिन आगे स्थिति और खराब हो सकती है। शांति की कोशिशों के बीच दोनों देशों के तेवर जिस तरह बने हुए हैं, उससे साफ है कि फिलहाल समाधान की राह आसान नहीं दिख रही। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या बातचीत आगे बढ़ेगी या एक बार फिर तनाव युद्ध का रूप ले लेगा।

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