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ईरान-इजरायल तनाव बढ़ने का खतरा, अमेरिका से बातचीत अटकी; होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर भी संकट

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन/मध्य पूर्व | 3 मई 2026

मध्य पूर्व में हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है और वह हर स्थिति के लिए तैयार है। दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के शांति प्रस्ताव पर नाराजगी जताई है, जिससे बातचीत का रास्ता और मुश्किल होता दिख रहा है।

ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे बातचीत चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। उनका आरोप है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है और पहले भी कई बार समझौते तोड़ चुका है। ईरान ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

तनाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा Strait of Hormuz की हो रही है। यह दुनिया का बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा दुनिया भर में जाती है। खबर है कि ईरान इस रास्ते पर कड़े नियम लाने की तैयारी कर रहा है, जिससे दुश्मन देशों के जहाजों की आवाजाही पर रोक लग सकती है।

अगर ऐसा होता है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं। कई देशों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है। अमेरिका भी इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रह सके।

लेबनान और आसपास के इलाकों से भी चिंताजनक खबरें आ रही हैं। वहां भले ही ‘सीजफायर’ यानी युद्धविराम की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। डॉक्टरों का कहना है कि आम लोग अब भी मारे जा रहे हैं, बच्चे घायल हो रहे हैं और हालात बेहद खराब हैं।

इजरायल को भी एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिज़्बुल्लाह ने ऐसे छोटे ड्रोन इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं, जिन्हें पकड़ना या गिराना काफी मुश्किल है। ये ड्रोन जमीन के बेहद करीब उड़ते हैं और आसानी से नजर नहीं आते।

इराक ने कहा है कि जैसे ही होर्मुज़ संकट खत्म होगा, वह एक हफ्ते के अंदर अपने तेल उत्पादन और निर्यात को सामान्य कर सकता है। इससे साफ है कि पूरा क्षेत्र इस संकट से प्रभावित हो रहा है। मध्य पूर्व में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक तरफ बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है। दुनिया की नजर अब इस पर टिकी है कि क्या कूटनीति से समाधान निकलेगा या हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ेंगे।

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