अंतरराष्ट्रीय | जयंत शरण | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 3 मई 2026
नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक भावुक और ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब करीब 13वीं सदी की एक प्राचीन भगवान बुद्ध की प्रतिमा को फिर से उसके असली मंदिर में स्थापित किया गया। यह वही प्रतिमा है, जो 1980 के दशक में चोरी हो गई थी और कई साल बाद अमेरिका के न्यूयॉर्क में मिली।शुक्रवार को जब इस प्रतिमा को पारंपरिक ढंग से पालकी में रखकर मंदिर तक लाया गया, तो पूरा माहौल भक्ति और खुशी से भर गया। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक संगीत के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। कई लोगों की आंखें नम थीं, क्योंकि उनका “भगवान” दशकों बाद वापस लौटा था।
67 साल की श्रद्धालु सुनकेसरी शाक्य ने कहा, “आज बहुत खुशी का दिन है। ऐसा लग रहा है जैसे हमारा भगवान फिर हमारे बीच आ गया हो।” उन्होंने उस दिन को भी याद किया, जब यह प्रतिमा चोरी हुई थी और पूरे इलाके में मायूसी छा गई थी।
यह प्रतिमा 2022 में न्यूयॉर्क से वापस नेपाल लाई गई थी। जानकारी के मुताबिक, यह वहां एक सांस्कृतिक संस्थान में पहुंच गई थी, जहां इसे किसी अज्ञात भिक्षु ने दान में दिया था। अब इसे फिर से उसी पुराने मंदिर में स्थापित किया गया है, जहां से इसे चुराया गया था।
इस खास मौके पर अमेरिका के एक प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पुराने समय में जो गलतियां हुईं, उन्हें अब सुधारा जा रहा है और ऐसे ऐतिहासिक धरोहरों को उनके असली स्थान पर लौटाना जरूरी है।
यह आयोजन Buddha Jayanti के अवसर पर हुआ, जो भगवान बुद्ध के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस वजह से यह कार्यक्रम और भी खास बन गया।
नेपाल एक ऐसा देश है, जहां धर्म और संस्कृति लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। यहां के मंदिर, मूर्तियां और पुरानी कलाकृतियां सिर्फ कला नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक हैं। लेकिन पिछले कई दशकों में यहां से हजारों की संख्या में ऐसी मूर्तियां और धरोहर चोरी हो चुकी हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 200 से ज्यादा प्राचीन वस्तुएं विदेशों से वापस लाई जा चुकी हैं, जिनमें लकड़ी की नक्काशी, पेंटिंग्स, धार्मिक ग्रंथ और देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं। इनमें से 41 वस्तुओं को उनके मूल स्थान पर दोबारा स्थापित किया जा चुका है।
अभी भी सैकड़ों की संख्या में ऐसी धरोहरें लापता हैं। असल संख्या हजारों में हो सकती है। नेपाल सरकार अब अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों से और भी प्राचीन वस्तुएं वापस लाने की कोशिश कर रही है।
संरक्षण विशेषज्ञों के मुताबिक, ये मूर्तियां सिर्फ पत्थर या लकड़ी की चीजें नहीं हैं, बल्कि “जीवित विरासत” हैं—यानी ये लोगों की आस्था और पहचान से जुड़ी हुई हैं।बुद्ध प्रतिमा की यह घर वापसी सिर्फ एक मूर्ति का लौटना नहीं है, बल्कि यह नेपाल की संस्कृति, आस्था और इतिहास की वापसी है—जिसने एक बार फिर लोगों के दिलों में खुशी और गर्व भर दिया है।




