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ताइवान पर चीन की खुली धमकी: ‘सबसे बड़ा खतरा’ बताया, एशिया में टकराव के संकेत तेज

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अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | ताइपेई/बीजिंग | 1 मई 2026

ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव अब और खुलकर सामने आ गया है। चीन ने साफ शब्दों में ताइवान को दोनों देशों के रिश्तों के लिए “सबसे बड़ा खतरा” बताया है, जिसके बाद ताइवान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चिंता जताई है। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन बार-बार इस मुद्दे पर धमकी भरे बयान दे रहा है, जो क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बातचीत हुई। इस बातचीत में चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह ताइवान को लेकर “सही फैसला” करे, वरना दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। इस बयान को सीधे तौर पर दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

स्थिति इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो गई है क्योंकि कुछ ही समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है। इस बैठक में ताइवान का मुद्दा सबसे अहम रहने वाला है। इससे पहले ही दोनों देशों के बीच शब्दों की जंग तेज हो गई है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में टकराव और बढ़ सकता है।

चीन लगातार ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और कई बार कह चुका है कि वह जरूरत पड़ने पर ताकत का इस्तेमाल करके भी इसे अपने कब्जे में ले सकता है। इसी रणनीति के तहत उसने हाल के वर्षों में ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं। रोजाना युद्धपोत और लड़ाकू विमानों की मौजूदगी ताइवान पर दबाव बनाने की कोशिश मानी जा रही है।

वहीं ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला क्षेत्र मानता है और किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार करने से इनकार करता है। ताइवान का कहना है कि उसकी सुरक्षा और भविष्य का फैसला उसके लोग करेंगे, न कि बाहरी ताकतें।

अमेरिका की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद अहम बनी हुई है। भले ही वह ताइवान को औपचारिक रूप से देश के तौर पर मान्यता नहीं देता, लेकिन वह उसका सबसे बड़ा समर्थक और हथियार देने वाला देश है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के बयान कि वे ताइवान को हथियारों की बिक्री पर चीन से बात कर सकते हैं, ने इस विवाद को और भड़का दिया है।

पूरी स्थिति अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव का रूप लेती दिख रही है। एशिया में बढ़ते इस तनाव पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि अगर हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा सकता है।

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