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अमेरिका का ‘डार्क ईगल’ बनाम ईरान का ‘अराश’: बढ़ते तनाव के बीच खतरनाक हथियारों की होड़ तेज

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अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 1 मई 2026

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि सीजफायर टूट सकता है और दोनों देशों के बीच टकराव किसी भी वक्त खुलकर सामने आ सकता है। इसी बीच दोनों देश अपने-अपने सबसे खतरनाक हथियारों को तैयार करने और दिखाने में जुट गए हैं। अमेरिका जहां पहली बार युद्ध में अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात करने की तैयारी कर रहा है, वहीं ईरान ने अपने नए ‘अराश’ ड्रोन को दुनिया के सामने पेश कर यह संकेत दे दिया है कि वह भी किसी से पीछे नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की नजर ‘डार्क ईगल’ नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल पर है, जिसे अब तक का सबसे तेज और सटीक हथियार माना जा रहा है। यह मिसाइल आवाज की गति से कई गुना ज्यादा तेज चलती है और बहुत दूर बैठे लक्ष्य को भी सटीक निशाना बना सकती है। इसकी रेंज करीब 1700 मील से ज्यादा बताई जा रही है, यानी यह बहुत लंबी दूरी तक हमला कर सकती है। खास बात यह है कि इसे रोकना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि इसकी गति और दिशा बदलने की क्षमता इसे और खतरनाक बना देती है। बताया जा रहा है कि अगर इसे युद्ध में उतारा गया तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका इस तरह की मिसाइल का इस्तेमाल करेगा।

दूसरी तरफ ईरान भी पूरी तैयारी में है। उसने अपने नए ‘अराश’ ड्रोन को सार्वजनिक किया है, जो एक कामिकेज ड्रोन है। इसका मतलब यह है कि यह ड्रोन लक्ष्य पर जाकर खुद को टकराकर नष्ट कर देता है और भारी नुकसान पहुंचाता है। ईरान पहले भी ‘अराश-2’ जैसे ड्रोन का इस्तेमाल कर चुका है, जिससे दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। अब नए संस्करण को और ज्यादा ताकतवर और सटीक बताया जा रहा है। ईरान के नेताओं का कहना है कि उन्होंने अभी तक अपनी पूरी ताकत नहीं दिखाई है और जरूरत पड़ने पर वह और बड़े कदम उठा सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व के हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को दबाव में लाकर बातचीत की मेज पर लाना चाहता है, जबकि ईरान साफ कह चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह करारा जवाब देगा। दोनों तरफ से लगातार बयान और तैयारियां यह दिखा रही हैं कि हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर यह टकराव बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ सकता है, खासकर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या तनाव बातचीत से कम होगा या फिर दुनिया एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

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