राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/लखनऊ | अनिल यादव | 29 अप्रैल 2026
समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोलते हुए इतिहास और विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “विरासत को वही बचाता है, जिसे यह उम्मीद होती है कि उसका नाम इतिहास में दर्ज होगा। लेकिन बीजेपी का न कोई इतिहास है और न भविष्य में होगा, इसलिए वे इतिहास को मिटाना चाहते हैं।” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी की विचारधारा और उसके ऐतिहासिक योगदान पर सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी संगठनों के पास ऐसा कोई सकारात्मक इतिहास नहीं है, जिस पर वे गर्व कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि यही वजह है कि वे इतिहास को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, “बीजेपी और उनके माफ़ीजीवी संगी-साथियों का जो भी इतिहास मिलता है, वह नकारात्मक है। इसलिए वे उसे लोगों के दिमाग से मिटाना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास को बदलने की यह कोशिश इसलिए की जा रही है ताकि लोगों को वास्तविक तथ्यों से दूर रखा जा सके।
अखिलेश यादव ने “अनरजिस्टर्ड” शब्द का भी इस्तेमाल किया और कहा कि जिनका कोई पंजीकृत या दर्ज इतिहास नहीं होता, वे अपनी पहचान बनाने के लिए इतिहास को बदलने का रास्ता अपनाते हैं। उन्होंने कहा, “जो आज भी अनरजिस्टर्ड हैं, उनका न बीते समय में कोई इतिहास मिलता है और न आने वाले समय में मिलेगा।” उनके इस बयान का मतलब साफ था कि वे बीजेपी के अतीत और उसकी राजनीतिक यात्रा को सवालों के घेरे में रख रहे हैं।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सिर्फ आजादी से पहले ही नहीं, बल्कि आजादी के बाद भी बीजेपी और उसके साथियों का कोई सकारात्मक योगदान सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि “इनके कारनामे काले हैं, इसलिए ये लोग इतिहास में अपनी जगह नहीं बना पाए और अब उसे बदलने की कोशिश कर रहे हैं।” उनके इस बयान में साफ तौर पर राजनीतिक हमला झलकता है, जिसमें उन्होंने बीजेपी को इतिहास के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि इतिहास सिर्फ किताबों का विषय नहीं है, बल्कि यह किसी भी राजनीतिक दल की पहचान और उसकी विरासत को तय करता है। उनके अनुसार, जिन लोगों को अपने काम और योगदान पर भरोसा होता है, वे इतिहास को बचाने की बात करते हैं, जबकि जिनके पास ऐसा कुछ नहीं होता, वे उसे बदलने की कोशिश करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बीजेपी को निशाने पर रखते हुए कहा कि इतिहास को लेकर उनकी सोच और काम करने का तरीका इसी दिशा में दिखता है।
अखिलेश यादव के इस बयान में यह भी झलकता है कि वे इतिहास और विरासत को राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनाना चाहते हैं। उन्होंने जिस तरह से “इतिहास मिटाने” और “इतिहास बदलने” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, उससे यह साफ होता है कि यह सिर्फ एक सामान्य टिप्पणी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। उनके बयान में बार-बार यह बात सामने आई कि इतिहास को लेकर जो भी प्रयास हो रहे हैं, वे सही दिशा में नहीं हैं। अखिलेश यादव ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि बीजेपी का कोई सकारात्मक इतिहास नहीं है और इसी वजह से वह इतिहास को बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी दोहराया कि जिनका अतीत मजबूत नहीं होता, उनका भविष्य भी स्पष्ट नहीं होता। उनके इस बयान ने इतिहास, विरासत और राजनीति के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें आने वाले समय में और भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।




