अंतरराष्ट्रीय / नेपाल | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू 29 अप्रैल 2026
नेपाल में इन दिनों एक बड़ा मुद्दा चर्चा में है—झुग्गी बस्तियों को हटाने की कार्रवाई। सरकार शहरों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए सार्वजनिक जमीन पर बनी बस्तियों को हटा रही है, लेकिन अब यह मामला अदालत तक पहुंच गया है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से साफ जवाब मांगा है कि आखिर लोगों को हटाने की यह कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है।काठमांडू समेत देश के कई शहरों—जैसे बुटवल, बिरगंज और पोखरा—में प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। खासकर नदी किनारे, सड़कों के पास और सरकारी जमीन पर बनी झुग्गियों को हटाने के लिए बुलडोजर और मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे शहरों की बेहतर प्लानिंग होगी और बाढ़ जैसे खतरों से भी बचाव किया जा सकेगा।
हालांकि, इस कार्रवाई से हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवार ऐसे हैं जो सालों से इन जगहों पर रह रहे थे। उनका कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई और जगह नहीं है, और अचानक हटाए जाने से वे बेघर हो सकते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें पहले से जानकारी तो दी गई, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया।
इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। अदालत ने सरकार और काठमांडू महानगर से जवाब मांगा है कि क्या यह कार्रवाई कानून के तहत सही तरीके से की जा रही है या नहीं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 5 मई को पेश होकर अपनी बात रखने के लिए कहा है।
नेपाल के कानून में हर नागरिक को “आवास का अधिकार” दिया गया है। संविधान का अनुच्छेद 37 कहता है कि किसी भी आदमी को बिना कानूनी प्रक्रिया के उसके घर से नहीं हटाया जा सकता। साथ ही, पहले उसे रहने के लिए दूसरी जगह देना जरूरी होता है। यही कारण है कि यह मामला अब और गंभीर हो गया है।
देश में करीब 11 लाख से ज्यादा ऐसे परिवार हैं जिनके पास अपनी जमीन नहीं है। ऐसे में अगर बस्तियां हटाई जाती हैं, तो यह समस्या और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बुलडोजर चलाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि सरकार को इन लोगों के लिए स्थायी समाधान निकालना होगा। नेपाल में यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी और अधिकारों का बन गया है। एक तरफ शहरों को व्यवस्थित करने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ हजारों परिवारों का भविष्य भी दांव पर है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी है, जो तय करेगा कि आगे क्या होगा।




