अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | 29 अप्रैल 2026
दुनिया की सबसे अहम समुद्री राहों में से एक पनामा नहर को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका समेत लैटिन अमेरिका के कई देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने पनामा के खिलाफ आर्थिक दबाव बनाने के लिए उसके झंडे वाले जहाजों को रोकना शुरू कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक व्यापार और समुद्री आवाजाही को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि पनामा नहर दुनिया के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालती है। विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पनामा की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए हांगकांग की कंपनी CK Hutchison की सहायक कंपनी के साथ हुए पुराने कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया। यह कंपनी पनामा नहर के दो बड़े पोर्ट—बालबोआ और क्रिस्टोबल—का संचालन कर रही थी। कोर्ट ने इन समझौतों को असंवैधानिक बताते हुए खत्म कर दिया, जिसके बाद हालात तेजी से बदलने लगे।
अमेरिका और कुछ अन्य देशों का आरोप है कि इस फैसले के बाद चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए पनामा के झंडे वाले करीब 70 जहाजों को रोक लिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह संख्या सामान्य से कहीं ज्यादा है और इसे “टारगेटेड आर्थिक दबाव” के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यह कदम सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने के लिए उठाया गया है।
अमेरिका, बोलीविया, कोस्टा रिका, गुयाना, पैराग्वे और त्रिनिदाद-टोबैगो जैसे देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें पनामा के समर्थन में खड़े होने की बात कही गई है। इन देशों का कहना है कि समुद्री व्यापार को राजनीतिक हथियार बनाना सही नहीं है और इससे पूरे क्षेत्र की संप्रभुता पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उन्होंने साफ कहा कि पनामा पर किसी भी तरह का दबाव डालना सिर्फ उस देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए खतरे जैसा है। उनका कहना है कि अमेरिका पनामा के साथ खड़ा है और उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका पर ही पलटवार किया है। चीन का कहना है कि अमेरिका उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और यह पूरी कहानी राजनीतिक रंग देने की कोशिश है। चीन ने पनामा कोर्ट के फैसले को भी “गलत” और “शर्मनाक” बताया है।
इस विवाद का असर सिर्फ पनामा तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह जहाजों को रोका जाता रहा, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। पनामा के झंडे वाले जहाज अमेरिका के व्यापार में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह मामला सीधे तौर पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ जाता है।
कुछ बड़ी शिपिंग कंपनियों पर भी असर पड़ने की खबर है। बताया जा रहा है कि जिन कंपनियों को पनामा के पोर्ट्स का नया जिम्मा दिया गया, उन्हें भी चीन की ओर से दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह विवाद अब सिर्फ एक कंपनी या एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े स्तर पर फैलता जा रहा है।
आज के दौर में समुद्री व्यापार सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि ताकत का जरिया बन गया है। जो देश इन रास्तों को नियंत्रित करता है, वह वैश्विक राजनीति में भी मजबूत स्थिति में होता है। यही वजह है कि पनामा नहर जैसे अहम रास्ते को लेकर इतनी खींचतान देखने को मिल रही है। यह मामला सिर्फ एक कानूनी फैसले या कुछ जहाजों के रोके जाने का नहीं है, बल्कि यह दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच बढ़ती खींचतान का संकेत है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर आने वाले समय में पूरी दुनिया के व्यापार और राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।




