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WATCH VIDEO —ग्रेट निकोबार में दादी को याद कर भावुक हुए राहुल गांधी: 42 साल पुरानी यादों के साथ दिया बड़ा संदेश

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राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | ग्रेट निकोबार | 29 अप्रैल 2026

ग्रेट निकोबार द्वीप की शांत वादियों और समुद्र की लहरों के बीच खड़े होकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक खास पल में दिखाई दिए—जहां राजनीति से ज्यादा भावनाएं थीं और यादों की गहराई थी। उन्होंने अपनी दादी इंदिरा गांधी को याद करते हुए बताया कि 19 फरवरी 1984 को वह इसी द्वीप के सबसे दक्षिणी छोर तक पहुंची थीं। आज तक वह देश की एकमात्र प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने इस दूरस्थ और खूबसूरत जगह का दौरा किया था।

राहुल गांधी ने कहा कि 42 साल बाद उसी जगह पर खड़े होना उनके लिए बेहद भावुक अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि जब वह उस लाइटहाउस के पास खड़े थे, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे इतिहास उनके सामने जीवंत हो उठा हो। उन्होंने महसूस किया कि इंदिरा गांधी ने भारत को सिर्फ राजधानी या बड़े शहरों से नहीं, बल्कि देश के अंतिम छोर तक जाकर समझा था। यह अनुभव उनके लिए सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक जुड़ाव का पल था—अतीत से, परिवार से और देश की उस मिट्टी से, जो अक्सर नजरों से दूर रहती है।

इस भावुक क्षण के साथ राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार की खूबसूरती का भी दिल खोलकर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जगह उन्होंने अब तक देखी सबसे सुंदर जगहों में से एक है। चारों तरफ फैले घने जंगल, नीला समंदर और शांत वातावरण—यह सब मिलकर एक ऐसा नजारा बनाते हैं, जो किसी को भी हैरान कर दे। उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें एहसास हुआ कि भारत की असली ताकत सिर्फ उसके बड़े शहरों में नहीं, बल्कि उसकी सीमाओं और दूर-दराज के इलाकों में भी छिपी है।

लेकिन इस खूबसूरती के साथ राहुल गांधी ने एक चिंता भी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि ग्रेट निकोबार जैसे संवेदनशील और प्राकृतिक रूप से समृद्ध इलाके को बचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विकास के नाम पर ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे यहां की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह हर संभव कोशिश करेंगे ताकि इस क्षेत्र की प्रकृति सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियां भी इसकी सुंदरता को देख सकें।

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ग्रेट निकोबार में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को लेकर बहस तेज है। एक ओर सरकार और कुछ विशेषज्ञ इन प्रोजेक्ट्स को विकास और रणनीतिक जरूरत बताते हैं, तो दूसरी ओर पर्यावरणविद चेतावनी दे रहे हैं कि इससे यहां के जंगल, वन्यजीव और समुद्री जीवन को खतरा हो सकता है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा और उनका बयान इस बहस को और मजबूत करता नजर आ रहा है।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत की खूबसूरती सिर्फ उसके केंद्र में नहीं, बल्कि उसकी सीमाओं में भी उतनी ही जीवंत और अद्भुत है। उन्होंने इसे महसूस करने की बात कही और कहा कि देश को समझने के लिए इन दूर-दराज के इलाकों को देखना और समझना बहुत जरूरी है। ग्रेट निकोबार का यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा पल बन गया जहां एक नेता अपने अतीत से जुड़ा, अपनी दादी को याद किया और साथ ही देश के भविष्य के लिए एक बड़ा संदेश भी दिया। यह कहानी केवल एक यात्रा की नहीं, बल्कि भावना, जिम्मेदारी और भारत की असली पहचान को समझने की कहानी बन गई है।

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