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नेपाल के ‘भंसार टैक्स’ का असर, भारत के सीमावर्ती 30 से ज्यादा बाजारों की रौनक घटी

बिजनेस/ नेपाल / बिहार / उत्तर प्रदेश | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र | 27 अप्रैल 2026

भारत-नेपाल सीमा पर कारोबार से जुड़े इलाकों में इन दिनों सुस्ती का माहौल देखने को मिल रहा है। इसकी बड़ी वजह नेपाल सरकार का नया फैसला बताया जा रहा है, जिसके तहत सीमा पार से आने वाले सामानों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। अब छोटे से छोटे सामान पर भी ‘भंसार टैक्स’ यानी सीमा शुल्क लगाया जा रहा है। स्थिति यह है कि लगभग 100 रुपये तक के सामान पर भी टैक्स वसूला जा रहा है, जिससे सीमावर्ती भारतीय बाजारों पर सीधा असर पड़ा है।

दरअसल, वर्षों से भारत-नेपाल सीमा के आसपास के बाजारों में नेपाली नागरिक बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए आते रहे हैं। भारत में कई सामान सस्ते होने के कारण ये बाजार हमेशा गुलजार रहते थे। खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड से लगे सीमावर्ती कस्बों में रोजाना हजारों की संख्या में ग्राहक पहुंचते थे, जिससे स्थानीय व्यापारियों की अच्छी आमदनी होती थी। लेकिन नेपाल की नई नीति के बाद यह आवाजाही अचानक कम हो गई है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई दुकानदारों के अनुसार, पहले जहां दिनभर ग्राहकों की भीड़ रहती थी, अब वहां सन्नाटा छाया रहता है। कपड़े, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और दैनिक उपयोग की चीजों की दुकानों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी आमदनी 30 से 50 प्रतिशत तक घट गई है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

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नेपाल सरकार का यह कदम वहां की नई आर्थिक नीतियों का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली अनियमित खरीदारी पर रोक लगाना और घरेलू बाजार को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। हालांकि, इसका असर भारत के सीमावर्ती बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां करीब 30 से अधिक छोटे-बड़े बाजारों की रौनक फीकी पड़ गई है।

सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोग भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं। कई स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले बाजारों में रौनक रहती थी, जिससे छोटे दुकानदारों, ठेला चलाने वालों और मजदूरों को भी काम मिलता था। लेकिन अब कारोबार ठप होने से रोजगार पर भी असर पड़ रहा है। इससे पूरे इलाके की आर्थिक गतिविधियां धीमी हो गई हैं।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार व्यापार पर इस तरह की सख्ती का असर दोनों देशों के छोटे कारोबारियों पर पड़ता है। जहां नेपाल अपने घरेलू उद्योग को बचाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत के सीमावर्ती बाजारों के लिए यह बड़ा झटका साबित हो रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि सीमा से जुड़े क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो।

नेपाल के ‘भंसार टैक्स’ ने सीमावर्ती इलाकों की तस्वीर बदल दी है। जहां पहले चहल-पहल और कारोबार का माहौल था, वहां अब मंदी का असर साफ नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस नीति में कोई ढील दी जाती है या भारतीय बाजारों को इस नई स्थिति के साथ ही खुद को ढालना पड़ेगा।

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