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रिकॉर्ड वोटिंग से गूंजे बंगाल और तमिलनाडु, जनता ने दिखाया लोकतंत्र पर भरोसा

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई | 23 अप्रैल 2026

West Bengal और Tamil Nadu में गुरुवार को हुए विधानसभा चुनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत में लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता की ताकत है। पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 152 सीटों और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर मतदान हुआ और जो आंकड़े सामने आए, वे अपने आप में बहुत कुछ कह देते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 91.68 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84.60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इतनी बड़ी भागीदारी यह दिखाती है कि लोग अपने वोट के अधिकार को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक और सक्रिय हो चुके हैं।

सुबह जैसे ही मतदान शुरू हुआ, दोनों राज्यों में मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। गांवों से लेकर शहरों तक हर जगह एक अलग ही उत्साह नजर आया। बुजुर्ग, महिलाएं, युवा—हर वर्ग के लोग अपने-अपने काम छोड़कर वोट डालने पहुंचे। कई जगहों पर लोग सुबह 7 बजे से पहले ही लाइन में लग गए थे, ताकि जल्दी मतदान कर सकें। खास बात यह रही कि महिलाओं की भागीदारी भी काफी मजबूत दिखी, जो लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

तमिलनाडु में यह चुनाव एक ही चरण में संपन्न हुआ, जहां कुल 5.73 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यहां 75 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए थे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। चेन्नई सहित बड़े शहरों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर अच्छी भीड़ देखने को मिली। फिल्म और राजनीति से जुड़े कई बड़े चेहरों ने भी मतदान किया, जिससे आम लोगों में भी उत्साह बढ़ा। कुल मिलाकर तमिलनाडु में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और किसी बड़ी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई।

वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव का माहौल थोड़ा अलग रहा। यहां भी भारी संख्या में लोगों ने मतदान किया, लेकिन कुछ जगहों से छिटपुट हिंसा और झड़पों की खबरें सामने आईं। मुर्शिदाबाद और कुछ अन्य इलाकों में राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच विवाद हुआ, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। हालांकि, सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासन की सक्रियता के चलते हालात को जल्दी नियंत्रित कर लिया गया और मतदान प्रक्रिया जारी रही। इन घटनाओं के बावजूद मतदान प्रतिशत पर कोई खास असर नहीं पड़ा, जो यह दिखाता है कि लोग किसी भी हाल में अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहते हैं।

इस चुनाव में एक दिलचस्प बात यह भी रही कि कई मतदान केंद्रों पर तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियां भी सामने आईं। कहीं ईवीएम में खराबी आई तो कहीं अचानक जंगली जानवर के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई। लेकिन प्रशासन ने इन सभी समस्याओं को जल्द सुलझा लिया और मतदान को प्रभावित नहीं होने दिया। यह चुनाव आयोग की तैयारियों और व्यवस्था का भी एक बड़ा उदाहरण है।

राजनीतिक नजरिए से देखें तो दोनों राज्यों में यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान हुआ, वहीं आगे 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होगी। इसके बाद 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। तमिलनाडु में चूंकि सभी सीटों पर एक ही दिन मतदान हो गया है, इसलिए यहां भी अब सीधा मुकाबला नतीजों पर आकर टिक गया है। सभी राजनीतिक दलों की नजर अब 4 मई पर टिकी है, जब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किसे सत्ता की जिम्मेदारी सौंपी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का मतदान प्रतिशत कई मायनों में खास है। इतना ज्यादा मतदान अक्सर तब देखने को मिलता है, जब जनता बदलाव के मूड में होती है या फिर अपने नेतृत्व को लेकर स्पष्ट राय बना चुकी होती है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि यह रुझान किसके पक्ष में जाएगा, लेकिन इतना तय है कि इस बार जनता ने अपनी भूमिका पूरी मजबूती से निभाई है।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारत का लोकतंत्र जमीनी स्तर पर कितना मजबूत है। चुनौतियां चाहे जितनी भी हों—चाहे वह मौसम हो, दूरी हो या स्थानीय तनाव—लोग अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटते। अब पूरे देश की नजर 4 मई पर है, जब इन राज्यों की राजनीति की दिशा तय होगी और यह साफ होगा कि जनता ने किस पर भरोसा जताया है।

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