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जिस दिन उसने जुर्म किया, उसी दिन हमारे लिए मर गया — रेप और मर्डर के आरोपी के परिवार का शव लेने से इंकार

अपराध / उत्तर प्रदेश | ABC NATIONAL NEWS | गाजियाबाद | 22 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक मूल्यों को भी झकझोर कर रख दिया है। रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध के आरोपी की मौत के बाद उसके अपने ही परिवार ने उसका शव लेने से साफ इनकार कर दिया। परिवार का कहना है कि “जिस दिन उसने यह घिनौना अपराध किया, उसी दिन वह हमारे लिए मर गया था।” इस बयान ने पूरे इलाके में गहरी चर्चा छेड़ दी है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर अपराध किस हद तक इंसान को अपने ही लोगों से अलग कर देता है।

बताया जा रहा है कि आरोपी पर एक युवती के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी निर्मम हत्या का आरोप था। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया के तहत परिवार को सूचना दी और शव लेने के लिए बुलाया। लेकिन परिवार ने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। परिजनों ने कहा कि वे ऐसे व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के लिए भी तैयार नहीं हैं जिसने इंसानियत को शर्मसार किया हो।

परिवार के इस फैसले ने समाज में एक मजबूत संदेश देने का काम किया है। आमतौर पर भारतीय समाज में परिवार हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहता है, लेकिन इस मामले में परिवार ने नैतिकता को रिश्तों से ऊपर रखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम भले ही कठोर लगे, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि अब समाज ऐसे अपराधों को किसी भी रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। वहीं प्रशासन के सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब परिवार शव लेने से इनकार कर दे, तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाए। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में प्रशासन ही अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाता है।

घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच गुस्सा और दुख दोनों देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां लोग पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपी के परिवार के इस फैसले को भी एक कड़ा लेकिन जरूरी सामाजिक संदेश माना जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए और परिवार का यह कदम आने वाले समय में दूसरों के लिए चेतावनी का काम करेगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल कानून के सख्त होने से ऐसे अपराध रुक सकते हैं, या समाज को भी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक सामाजिक आईना बन गई है, जिसमें रिश्तों, नैतिकता और न्याय के बीच की जंग साफ दिखाई देती है।

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