राष्ट्रीय / केरलम
केरल के Thrissur जिले में मंगलवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जब एक पटाखा बनाने और स्टोर करने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण विस्फोट हो गया। यह धमाका इतना जोरदार था कि आसपास का पूरा इलाका दहल उठा और देखते ही देखते आग की ऊंची लपटें आसमान तक उठने लगीं। इस हादसे में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के समय फैक्ट्री में कई मजदूर मौजूद थे, जो रोज की तरह अपने काम में लगे हुए थे, लेकिन एक पल में सब कुछ बदल गया। शुरुआती विस्फोट के बाद लगातार छोटे-छोटे धमाके होते रहे, जिससे हालात और भी भयावह हो गए। फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में पटाखे और विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी, जो आग लगने के बाद एक-एक कर फटने लगी। इससे राहत और बचाव कार्य में भी काफी मुश्किलें आईं। आसपास के खुले इलाकों और खेतों में भी पटाखे फैल गए थे, जो समय-समय पर फटते रहे और लोगों के बीच दहशत का माहौल बना रहा। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे लोग घबरा गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया गया। दमकल विभाग की कई गाड़ियां आग बुझाने में जुट गईं, लेकिन लगातार हो रहे धमाकों के कारण उन्हें भी काफी सावधानी बरतनी पड़ी। घायल लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में लगी हुई है और घायलों को बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
त्योहार की तैयारियों के बीच यह हादसा हुआ है, सुरक्षा पर सवाल
बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री आने वाले प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव के लिए पटाखों की तैयारी कर रही थी। इसी कारण यहां बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जमा थी, जिससे धमाका और भी भयानक हो गया। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्या फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन हो रहा था? क्या इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखना सुरक्षित था? इन सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी गई है।
इलाके में शोक और गुस्से का माहौल
इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके घरों में मातम पसरा हुआ है। वहीं स्थानीय लोगों में भी इस तरह की घटनाओं को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी लापरवाही क्यों होती है, जिसकी कीमत मासूम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि पटाखा फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीरता से कदम उठाए जाते हैं। थोड़ी सी सावधानी और सख्त नियमों का पालन शायद कई जिंदगियां बचा सकता है।




