राष्ट्रीय खबर | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अप्रैल 2026
देश में चल रही डिजिटल जनगणना प्रक्रिया के बीच एक गंभीर तकनीकी चूक सामने आने से विवाद खड़ा हो गया। जनगणना के सेल्फ – एन्यूमरेशन (Self – Enumeration) पोर्टल पर अरुणाचल प्रदेश के एक शहर को गलती से चीन का हिस्सा दिखा दिया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। हालांकि, सरकार ने तुरंत सफाई देते हुए इसे “तकनीकी मैपिंग त्रुटि” बताया और कहा कि समस्या को कुछ ही घंटों में ठीक कर दिया गया।
मामला तब सामने आया जब एक रिटायर्ड भारतीय वायुसेना अधिकारी ने जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी भरते समय पाया कि अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट (Pasighat) शहर को “मेडोग (Medog)” के रूप में दिखाया जा रहा है, जो चीन के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित एक स्थान है। उन्होंने इस गड़बड़ी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि सरकारी पोर्टल पर ऐसी गलती कैसे हो सकती है, खासकर तब जब अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच पहले से संवेदनशील सीमा विवाद जारी है। कुछ लोगों ने इसे “डिजिटल स्तर पर भारत की जमीन सौंपने जैसा” बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह समस्या मैप सर्विस प्रोवाइडर की तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई थी। संबंधित एजेंसी को सूचित कर दिया गया था और उसी दिन शाम तक इस त्रुटि को सुधार लिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना 2027 के तहत पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल और सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रणाली लागू की जा रही है, जिसमें नागरिक खुद ऑनलाइन जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में लोकेशन की पहचान के लिए थर्ड-पार्टी मैप सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ऐसी तकनीकी त्रुटियां सामने आने की संभावना बनी रहती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की तकनीकी गड़बड़ी का किसी भी तरह से भारत की क्षेत्रीय स्थिति या आधिकारिक रुख से कोई संबंध नहीं है। केंद्र सरकार ने दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं हो सकता।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता रहा है और समय-समय पर वहां के स्थानों के नाम बदलने जैसी कोशिशें करता रहा है। भारत सरकार पहले भी इन दावों को सिरे से खारिज करती रही है और स्पष्ट कर चुकी है कि “नाम बदलने से वास्तविकता नहीं बदलती।”
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा और मैपिंग की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भू-राजनीतिक संवेदनशीलता अधिक है। इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि सरकारी डिजिटल सिस्टम में इस्तेमाल हो रही बाहरी तकनीकी सेवाओं की निगरानी और जांच कितनी जरूरी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।




