राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 19 अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल की सियासी आग इन दिनों और भी भड़कती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे मुंह पर चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उनमें सच्ची हिम्मत है और वे अपने पिता के असली बेटे हैं तो मतगणना वाले दिन 4 मई की आधी रात 12 बजे के बाद भी बंगाल में मौजूद रहकर दिखाएं। भगवानपुर में हुई एक जोरदार चुनावी रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने यह बयान दिया जिसने पूरे राज्य में तूफान खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब किसी भी बाहरी ताकत को राज्य की मिट्टी पर राज करने नहीं देगी और अगर शुरुआत बीजेपी ने की है तो इसे अंत तक पहुंचाने का जिम्मा तृणमूल कांग्रेस पूरी ताकत के साथ उठाएगी। यह चुनौती ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दो चरणों में मतदान 23 और 29 अप्रैल को हो चुका है और नतीजे 4 मई को आने वाले हैं। ममता बनर्जी की सरकार चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में है जबकि भाजपा राज्य में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में लगी हुई है। अभिषेक ने रैली में गरजते हुए कहा, “मैं अमित शाह को चुनौती देता हूँ। अगर आपमें हिम्मत है और आप अपने पिता के असली बेटे हैं, तो 4 मई की आधी रात 12 बजे के बाद बंगाल में मौजूद रहना। मैं देखना चाहता हूँ कि आप कितने बड़े गुंडे हैं। इसकी शुरुआत आपने की है, इसे खत्म हम करेंगे। खेला होबे!
अभिषेक बनर्जी की इस रैली में हजारों की भीड़ जुट थी और उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां और दिल्ली की ताकत का इस्तेमाल करके टीएमसी कार्यकर्ताओं को धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमित शाह बंगाल आकर खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि मतदान के दिन टीएमसी के लोग घरों में रहें लेकिन अब बंगाल की जनता जवाब देने के लिए तैयार है। अभिषेक ने कहा कि हमने हर ब्लॉक की लिस्ट तैयार कर ली है और चुनाव के बाद सूद समेत पूरा हिसाब चुकता किया जाएगा। उन्होंने अमित शाह पर व्यक्तिगत तौर पर हमला करते हुए कहा कि आप कितने बड़े गुंडे हैं यह 4 मई की रात को बंगाल में रहकर साबित करके दिखाइए। बंगाल की मिट्टी बाहरी लोगों के लिए कभी आसान नहीं रही है और यहां की जनता ने हमेशा अपनी गरिमा और स्वाभिमान की रक्षा की है। अभिषेक बनर्जी ने इस दौरान ममता बनर्जी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि दीदी ने बंगाल को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है और चौथी बार उनकी सरकार बनना तय है। उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि बंगाल अब दिल्ली के इशारों पर नहीं चलेगा बल्कि अपनी मिट्टी के बेटे-बेटियों के फैसले से आगे बढ़ेगा।
इस चुनौती के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। टीएमसी इसे बंगाल की अस्मिता की लड़ाई बता रही है जबकि भाजपा इसे टीएमसी की हताशा करार दे रही है। अमित शाह या भाजपा की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस पूरे मामले को कानून व्यवस्था का सवाल बनाकर उठा सकती है। पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों से टीएमसी और भाजपा के बीच तीखी टकराहट देखी जा रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी लेकिन भाजपा ने अपनी सीटों में काफी बढ़ोतरी की थी। अब 2026 के चुनाव में दोनों पार्टियां पूरे दमखम के साथ मैदान में हैं। अभिषेक बनर्जी की यह चुनौती न सिर्फ अमित शाह को बल्कि पूरे भाजपा नेतृत्व को टारगेट करती हुई नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल में घुसपैठ और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिशें हो रही हैं लेकिन जनता इसका मुंह तोड़ जवाब देगी।
रैली में अभिषेक बनर्जी ने स्थानीय मुद्दों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वी मेदिनीपुर समेत पूरे बंगाल में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। ममता बनर्जी की सरकार ने महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं जिनका लाभ आम जनता को मिल रहा है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी बंगाली अस्मिता पर हमला कर रही है। बंगाली भाषा, संस्कृति और खान-पान को निशाना बनाया जा रहा है। अभिषेक ने कहा कि हम बंगाल की बेटी ममता बनर्जी के नेतृत्व में लड़ रहे हैं और कोई भी बाहरी ताकत हमें डरा नहीं सकती। 4 मई को जब नतीजे आएंगे तो बंगाल की जनता तय करेगी कि कौन सही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लें लेकिन किसी भी धमकी के आगे न झुकें।
यह पूरा घटनाक्रम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे रहा है। एक तरफ टीएमसी बंगाल की स्वायत्तता और स्थानीय गौरव की बात कर रही है तो दूसरी तरफ भाजपा विकास, कानून व्यवस्था और केंद्र की योजनाओं पर जोर दे रही है। अभिषेक बनर्जी का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और लोग इसे लेकर अपनी राय रख रहे हैं। कुछ इसे साहसिक कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे अनावश्यक उत्तेजना मान रहे हैं। अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं जब मतगणना होगी और बंगाल का भविष्य तय होगा। क्या अमित शाह चुनौती स्वीकार करेंगे या नहीं यह देखना बाकी है लेकिन एक बात तय है कि बंगाल का खेला अब और भी रोचक हो गया है। तृणमूल कांग्रेस पूरे आत्मविश्वास के साथ कह रही है कि चौथी बार ममता बनर्जी की सरकार बनेगी और बंगाल दिल्ली के दबाव से मुक्त रहेगा।




