अंतरराष्ट्रीय/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/ वाशिंगटन | 18 अप्रैल 2026
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल लाइफलाइन माने जाने वाले Strait of Hormuz को ईरान ने 24 घंटे के अंदर एक बार फिर बंद कर दिया है। तेहरान का यह फैसला उस समय सामने आया जब अमेरिका की ओर से सख्त रुख और दबाव की राजनीति तेज होती दिखाई दी। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की हालिया चेतावनी ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया, जिसके बाद ईरान ने अपने रुख में अचानक बदलाव करते हुए इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता और चिंता को बढ़ा दिया है।
ईरान का कहना है कि वह किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है और अमेरिकी नीतियों को क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ मानता है। तेहरान के अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जब तक अमेरिका अपनी कथित नाकेबंदी और सैन्य दबाव की नीति से पीछे नहीं हटता, तब तक इस जलडमरूमध्य को खोलने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले भी ईरान ने सीमित शर्तों के साथ मार्ग खोलने की बात कही थी, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने स्थिति को फिर से उलझा दिया है। इस फैसले को केवल एक सामरिक कदम नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है, जो सीधे वाशिंगटन को संबोधित है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर भी पड़ेगा।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं। अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो न केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि होगी, बल्कि आयात लागत बढ़ने से महंगाई पर भी दबाव आएगा। इसके साथ ही सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे उद्योगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
वर्तमान घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि Strait of Hormuz अब केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान और वाशिंगटन पर टिकी हैं, जहां से आने वाला हर फैसला वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेगा।




