बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 अप्रैल 2026
भारत के सीमेंट उद्योग में वर्चस्व की जंग अब खुलकर सामने आ चुकी है। एक तरफ कुमार मंगलम बिड़ला के नेतृत्व में आदित्य बिड़ला समूह है, तो दूसरी ओर गौतम अडानी का तेजी से उभरता अडानी समूह। ताज़ा हालात बताते हैं कि इस मुकाबले में बिड़ला समूह ने निर्णायक बढ़त बना ली है।
आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख कंपनी UltraTech Cement ने उत्पादन क्षमता के मामले में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 200 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि केवल एक कॉरपोरेट माइलस्टोन नहीं, बल्कि भारतीय सीमेंट उद्योग में नेतृत्व की मजबूत घोषणा मानी जा रही है। कंपनी ने बीते कुछ वर्षों में नए प्लांट, विस्तार परियोजनाएं और रणनीतिक अधिग्रहणों के जरिए अपनी क्षमता में तेज़ वृद्धि की है।
UltraTech की मजबूती का एक बड़ा कारण उसकी देशभर में फैली उत्पादन इकाइयां, मजबूत सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गहरी पकड़ है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में उसकी मजबूत मौजूदगी ने उसे प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे खड़ा कर दिया है। यही वजह है कि वह लंबे समय से देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बनी हुई है और अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।
वहीं दूसरी तरफ Adani Cement के जरिए अडानी समूह ने सीमेंट सेक्टर में आक्रामक एंट्री की। Ambuja Cements और ACC Limited जैसे बड़े ब्रांड्स के अधिग्रहण के बाद समूह की कुल क्षमता करीब 100 MTPA के आसपास पहुंच चुकी है। यह विस्तार भले ही तेज़ है, लेकिन UltraTech के मुकाबले अभी भी लगभग आधा ही है।
अडानी समूह की रणनीति स्पष्ट रूप से विस्तार और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर केंद्रित है। कंपनी आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता को तेजी से बढ़ाने की दिशा में निवेश कर रही है, ताकि वह इस अंतर को कम कर सके। हालांकि मौजूदा स्थिति में वह ‘सीमेंट किंग’ की दौड़ में दूसरे स्थान पर ही नजर आता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 2–3 वर्षों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज़ होगी। जहां UltraTech 240 MTPA तक पहुंचने की योजना पर काम कर रही है, वहीं अडानी समूह भी 150 MTPA से अधिक क्षमता हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।
स्पष्ट है कि यह मुकाबला सिर्फ दो कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा तय करने वाला भी है। फिलहाल ताज कुमार मंगलम बिड़ला के सिर पर है, लेकिन गौतम अडानी की तेज़ रफ्तार इस लड़ाई को आने वाले समय में और दिलचस्प बनाने वाली है।




