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परिसीमन ‘राजनीतिक नोटबंदी’, महिला आरक्षण से जोड़ने की जरूरत नहीं : शशि थरूर

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अप्रैल 2026

महिला आरक्षण बिल और परिसीमन को लेकर संसद में जारी बहस अब तेज राजनीतिक टकराव में बदलती नजर आ रही है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, वह “राजनीतिक नोटबंदी” साबित हो सकती है।

थरूर ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर व्यापक सहमति है, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रियाओं से जोड़ना महिलाओं के अधिकारों को टालने जैसा है। उनका मानना है कि सरकार को यह आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करना चाहिए, न कि इसे भविष्य की प्रक्रियाओं पर निर्भर बनाना चाहिए।

उन्होंने सरकार के प्रस्ताव को “कांटों में लिपटा तोहफा” बताते हुए आरोप लगाया कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीतिक गणित साधने की कोशिश की जा रही है। संसद में बहस के दौरान विपक्ष के कई नेताओं ने भी आशंका जताई कि परिसीमन के बाद राज्यों के बीच सीटों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान हो सकता है।

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी है, ताकि सीटों का पुनर्गठन वर्तमान आबादी के अनुरूप किया जा सके। सरकार इसे एक संरचनात्मक सुधार के रूप में पेश कर रही है।

हालांकि विपक्ष इस तर्क को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए सत्ता संतुलन बदला जा सकता है और कुछ राज्यों को नुकसान पहुंचाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश हो सकती है।

महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ चुका है—जहां सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संतुलन पर संभावित खतरा मान रहा है।

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