अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/बीजिंग | 16 अप्रैल 2026
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा करते हुए दावा किया है कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping को सीधे पत्र लिखकर ईरान को हथियार न देने की अपील की थी। ट्रंप के मुताबिक, यह पहल उन्होंने ऐसे समय में की जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ रहे थे और अमेरिका तथा Iran के बीच टकराव की स्थिति गहराती जा रही थी। उन्होंने कहा कि यदि चीन जैसे शक्तिशाली देश ईरान को सैन्य सहायता देते हैं तो इससे न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि शी जिनपिंग ने उनके पत्र का जवाब देते हुए साफ किया कि चीन तेहरान को कोई हथियार नहीं दे रहा है, जिसे उन्होंने अपनी कूटनीतिक कोशिश की सकारात्मक उपलब्धि बताया।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव अपने चरम पर बना हुआ है और अमेरिका, यूरोप तथा मध्य-पूर्व के देशों के बीच लगातार रणनीतिक खींचतान चल रही है। अपने इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्होंने केवल अपील तक ही खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि उन देशों को कड़ी चेतावनी भी दी जो ईरान को सैन्य मदद मुहैया कराते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई देश इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उस पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, यहां तक कि 50 प्रतिशत तक टैरिफ भी लगाया जा सकता है। इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘आर्थिक दबाव के जरिए कूटनीति’ के तौर पर देखा जा रहा है, जहां सैन्य टकराव के बजाय व्यापारिक और आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल कर नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
इसी संदर्भ में ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz का भी जिक्र किया और दावा किया कि उन्होंने इस जलडमरूमध्य को हमेशा खुला रखने के लिए पहल की है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की रीढ़ है और अगर यहां कोई बाधा आती है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है, खासकर चीन जैसे बड़े आयातक देशों की। हालांकि, इस दावे पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में मतभेद है, क्योंकि हॉर्मुज़ क्षेत्र में अभी भी तनाव और अस्थिरता बनी हुई है और यहां किसी भी समय टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के ये बयान केवल एक कूटनीतिक पहल नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं। एक ओर वह खुद को वैश्विक संकटों को संभालने में सक्षम नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन और ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी भी दे रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि चीन की ओर से ट्रंप के इन दावों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह पूरी तरह ट्रंप की राजनीतिक रणनीति है या वास्तव में पर्दे के पीछे इस तरह का कोई संवाद हुआ था।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान की बढ़ती भूमिका, चीन के साथ उसके संबंध और अमेरिका की रणनीतिक नीति—इन सभी के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक कूटनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस तरह की बयानबाजी वास्तविक नीतिगत बदलाव का रूप लेती है या फिर यह केवल दबाव बनाने की एक रणनीति बनकर रह जाती है। फिलहाल इतना तय है कि ईरान को लेकर वैश्विक शक्ति संतुलन की यह जंग और तेज होने वाली है, जिसमें हर बड़ा देश अपने-अपने हितों के अनुसार चाल चल रहा है।




