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ममता बनर्जी का चुनावी ऐलान: ‘दीदी के 10 वादे’ के जरिए हर वर्ग को साधने की कोशिश, महिला-युवा-बुजुर्ग पर खास नजर

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राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 20 मार्च 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मी के बीच तृणमूल कांग्रेस ने अपना बहुप्रतीक्षित चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इसे “दीदी के 10 वादे” का नाम देते हुए जनता के सामने पेश किया। इस घोषणापत्र में साफ तौर पर महिलाओं, युवाओं, किसानों और बुजुर्गों को केंद्र में रखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी इस बार भी सीधी जनहित योजनाओं के सहारे चुनावी मैदान में उतर रही है।

घोषणापत्र का सबसे बड़ा फोकस महिला सशक्तिकरण पर है। तृणमूल कांग्रेस ने अपनी लोकप्रिय लक्ष्मी भंडार योजना को और विस्तार देने का वादा किया है। इसके तहत महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने की बात कही गई है, जिससे घर-परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी का मानना है कि महिला सशक्त होगी तो समाज अपने आप मजबूत होगा।

युवाओं को साधने के लिए रोजगार और कौशल विकास पर जोर दिया गया है। घोषणापत्र में कहा गया है कि राज्य में नए रोजगार अवसर पैदा किए जाएंगे, साथ ही युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और डिजिटल संसाधनों को बढ़ाने का भी वादा किया गया है, ताकि युवा प्रतिस्पर्धा के इस दौर में पीछे न रहें।

गरीब और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की बात कही गई है। सस्ती और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, सरकारी अस्पतालों को और सक्षम बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुधारने का रोडमैप भी घोषणापत्र में शामिल है। इसके साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को स्थिर करने के लिए भी कई कदम उठाने का वादा किया गया है।

बुजुर्गों के लिए पेंशन योजनाओं को और प्रभावी बनाने की घोषणा की गई है। तृणमूल कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि समाज के हर वर्ग—चाहे वह महिला हो, युवा हो या बुजुर्ग—सबकी सुरक्षा और सम्मान उसकी प्राथमिकता है।

घोषणापत्र जारी करते समय ममता बनर्जी ने राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन उनकी पार्टी विकास, शांति और सामाजिक सौहार्द के एजेंडे पर ही चुनाव लड़ेगी। तृणमूल कांग्रेस का यह घोषणा पत्र “जनकल्याण आधारित राजनीति” की रणनीति को आगे बढ़ाता हुआ नजर आता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि “दीदी के 10 वादे” बंगाल की जनता को कितना प्रभावित करते हैं और चुनावी नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।

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