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ट्रंप ने की अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी गलती, तबाही तय : ओमान

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मस्कट/वॉशिंगटन | 20 मार्च 2026

मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने अमेरिका पर बेहद सख्त और साफ शब्दों में हमला बोला है। उन्होंने अमेरिका के ईरान के खिलाफ सैन्य रुख को “इतिहास की सबसे बड़ी गलतियों में से एक” करार दिया और कहा कि यह फैसला पूरे क्षेत्र को विनाश की ओर ले जा सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका ने बिना सोचे-समझे एक ऐसे संघर्ष में खुद को झोंक दिया है, जिसका परिणाम न केवल सैन्य बल्कि आर्थिक और मानवीय स्तर पर भी भारी तबाही के रूप में सामने आएगा। बुसैदी के मुताबिक, यह सिर्फ एक रणनीतिक गलती नहीं बल्कि दूरगामी असर वाली चूक है, जिसका असर आने वाले कई वर्षों तक महसूस किया जाएगा। ओमान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि यह युद्ध वास्तव में अमेरिका की अपनी लड़ाई नहीं है, बल्कि वह बाहरी दबावों में आकर इसमें शामिल हुआ है। उन्होंने इशारों में कहा कि इजरायल के प्रभाव और क्षेत्रीय राजनीति के दबाव ने अमेरिका को इस रास्ते पर धकेला है। बुसैदी ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहना चाहिए था, लेकिन उसने अपनी प्राथमिकताओं को छोड़कर एक ऐसे संघर्ष को अपनाया, जिसमें उसका सीधा हित नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस फैसले से अमेरिका की वैश्विक छवि और उसकी कूटनीतिक विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बुसैदी ने एक अहम खुलासा करते हुए कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर सकारात्मक बातचीत चल रही थी और दोनों पक्ष एक समाधान के करीब पहुंच रहे थे। लेकिन अचानक हालात बदले और बातचीत का पूरा सिलसिला टूट गया। उनके अनुसार, अगर कूटनीतिक प्रयास जारी रहते तो यह संघर्ष टल सकता था और क्षेत्र में स्थिरता बनी रह सकती थी। उन्होंने इसे एक “खोया हुआ अवसर” बताया और कहा कि अब उसकी कीमत पूरी दुनिया चुका रही है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका के सहयोगी देशों से अपील की कि वे इस स्थिति को गंभीरता से लें और अमेरिका पर दबाव बनाएं ताकि वह इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोजे। बुसैदी ने कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह संघर्ष और फैल सकता है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक शांति को खतरा पैदा होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और तेल आपूर्ति में बाधा के कारण पूरी दुनिया आर्थिक संकट की चपेट में आ सकती है।

ओमान, जो लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक संतुलित और भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। बुसैदी ने कहा कि बातचीत, समझदारी और कूटनीति ही इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर अभी भी संवाद की पहल की जाए तो हालात को काबू में लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और समझदारी की जरूरत है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र के देशों में भी अमेरिका की नीतियों को लेकर असहजता बढ़ रही है। ओमान का यह बयान सिर्फ एक देश की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस व्यापक चिंता को दर्शाता है जो इस युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र में फैल रही है। अब यह देखना होगा कि अमेरिका इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वह टकराव की राह छोड़कर बातचीत और शांति की दिशा में कदम बढ़ाता है, या फिर यह संघर्ष और गहराता चला जाएगा।

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