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तुलसी गबार्ड : ट्रंप के दावे गलत, ईरान ने परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू नहीं किया

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 19 मार्च 2026

अमेरिका से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है, जिसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वैश्विक बहस को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सीनेट की खुफिया समिति के सामने गवाही देते हुए स्पष्ट कहा है कि ईरान फिलहाल अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता को दोबारा खड़ा करने की कोशिश नहीं कर रहा है।

तुलसी गबार्ड ने अपने बयान में बताया कि जून 2025 में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य अभियान “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के दौरान ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता पूरी तरह नष्ट कर दी गई थी। उन्होंने साफ कहा कि इस ऑपरेशन के बाद से अब तक ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू किया है।

यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि ईरान फिर से अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में गबार्ड का यह बयान ट्रंप के दावों के विपरीत एक अलग तस्वीर पेश करता है।

गबार्ड ने यह भी संकेत दिया कि खुफिया एजेंसियों के पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल ईरान की ओर से कोई सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं चलाया जा रहा है। इससे यह साफ होता है कि जमीनी स्थिति और राजनीतिक दावों के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है।

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट भी इसी तरह का बयान दे चुके हैं। उन्होंने भी कहा था कि ईरान किसी सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम पर काम नहीं कर रहा था। अब लगातार दो वरिष्ठ अधिकारियों के ऐसे बयान आने के बाद यह मुद्दा और अधिक गंभीर हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे का असर सिर्फ अमेरिका की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। अगर ईरान को लेकर खतरे का आकलन बदलता है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नीतियों में भी बदलाव संभव है।

यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है—क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाज़ी और खुफिया एजेंसियों की वास्तविक रिपोर्ट में अंतर होता है? फिलहाल, तुलसी गबार्ड के इस बयान ने अमेरिका में नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर राजनीतिक दावे हैं और दूसरी ओर तथ्यों पर आधारित आकलन।

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