एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 16 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध तीसरे हफ्ते में और तीखा हो गया है। दोनों पक्षों के बीच लगातार मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमले हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। युद्ध के बढ़ते दायरे का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ताजा घटनाक्रम में जेरूसलम के पास स्थित बेट शेमेश इलाके में ईरानी मिसाइल या उसके मलबे के गिरने की खबर सामने आई है। इजरायली मीडिया के मुताबिक इस घटना में अभी तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इलाके में नुकसान की आशंका बनी हुई है। हाल के दिनों में ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें से कुछ को इजरायल की एयर डिफेंस प्रणाली ने रोक लिया, जबकि कुछ मिसाइलें जमीन पर भी गिरी हैं।
इसी बीच अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के चाबहार फ्री ट्रेड जोन के आसपास सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस हमले के दौरान इलाके में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह क्षेत्र पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित है और ईरान के लिए सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने ईरान के कई बड़े शहरों — तेहरान, हमदान और इस्फहान — में भी हमले किए हैं। इजरायल ने दावा किया है कि उसने तेहरान स्थित तराश्त स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट को निशाना बनाकर उसे भारी नुकसान पहुंचाया है। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया है कि इन हमलों में बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 200 से अधिक बच्चे भी शामिल हैं।
इस संघर्ष का असर समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों और उनके समर्थकों के लिए बंद किया जा सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल परिवहन के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर दबाव बनाते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने और वैश्विक व्यापार को सामान्य बनाने के लिए उन्हें अमेरिका का साथ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सहयोगी देश इस मिशन में सहयोग नहीं करते हैं तो नाटो के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हालांकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि उनका देश इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोगी देशों के साथ काम करेगा, लेकिन व्यापक युद्ध में शामिल होने से बचेगा।
इजरायली सेना का कहना है कि ईरान के भीतर अभी भी हजारों सैन्य लक्ष्य मौजूद हैं और सैन्य अभियान जारी रहेगा। वहीं लेबनान की दक्षिणी सीमा पर भी तनाव बढ़ गया है, जहां इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या 850 के करीब पहुंचने की खबर है।
इस बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकालकर आर्मेनिया के रास्ते भारत लाया गया है। सरकार बाकी भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए भी प्रयास कर रही है।
पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।




