एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 16 मार्च 2026
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालात और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार कई बड़े देश महीनों तक चलने वाला रणनीतिक तेल भंडार बनाए हुए हैं, जबकि भारत के पास तुलनात्मक रूप से काफी कम स्टॉक है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जापान के पास लगभग 230 दिन तक चलने वाला तेल भंडार है। दक्षिण कोरिया के पास करीब 115 दिन, चीन के पास 90 दिनों से अधिक और अमेरिका के पास लगभग 85 दिनों तक चलने लायक तेल का स्टॉक मौजूद है। इसके मुकाबले भारत के पास सरकारी रणनीतिक भंडार और वाणिज्यिक स्टॉक मिलाकर सीमित अवधि का तेल भंडार बताया जाता है, जिसे लेकर ऊर्जा विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं।
भारत की आबादी दुनिया में सबसे अधिक है और देश की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती है। आंकड़ों के मुताबिक भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसलिए वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
गैस भंडार के मामले में भी भारत की स्थिति सीमित मानी जाती है। वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े भंडार रूस, ईरान और कतर जैसे देशों के पास हैं। इसके बाद अमेरिका और तुर्कमेनिस्तान जैसे देश भी गैस संसाधनों के कारण ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से मजबूत स्थिति में हैं। भारत में घरेलू गैस उत्पादन सीमित है और बड़ी मात्रा में गैस का आयात करना पड़ता है।
हालांकि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं। सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) विकसित किए हैं। विशाखापट्टनम, मंगलूरु और पादुर में भूमिगत भंडारण सुविधाएं बनाई गई हैं, जहां लाखों बैरल कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा दूसरे चरण के विस्तार पर भी काम चल रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत को अपने रणनीतिक भंडार को और बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर भी जोर देना होगा। क्योंकि वैश्विक संकट के समय मजबूत ऊर्जा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
यदि भारत अपने तेल और गैस भंडार को पर्याप्त स्तर तक नहीं बढ़ाता, तो वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान देश को आर्थिक दबाव और ऊर्जा अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा को अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।




