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होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों से बढ़ी चिंता, तेल-गैस ही नहीं खाद और अनाज की सप्लाई पर भी खतरा

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 मार्च 2026

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान द्वारा इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें (माइन्स) बिछाए जाने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद, केमिकल्स, अनाज और औद्योगिक मशीनरी की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग 23 किलोमीटर चौड़ा है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा और अन्य सामान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी समुद्री मार्ग में माइन्स बिछा दिए जाएं तो जहाजों के लिए वहां से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो जाता है, क्योंकि कुछ माइन्स सतह पर दिखाई देती हैं जबकि कई समुद्र की तलहटी में छिपी रहती हैं। ऐसे में किसी जहाज के गुजरते समय विस्फोट होने का खतरा बना रहता है।

इस तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार खाद (फर्टिलाइज़र) की कीमतों में तेजी आई है और कीमतें लगभग 470 डॉलर प्रति टन से बढ़कर करीब 584 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है तो कृषि लागत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब भारत सहित कई देशों में रबी फसलों का मौसम चल रहा है।

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी खाद की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसमें से लगभग 40 प्रतिशत आपूर्ति मध्य-पूर्व क्षेत्र से आती है। यदि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो खाद और अन्य जरूरी कृषि इनपुट की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है।

समुद्री परिवहन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध या सैन्य तनाव की स्थिति में जहाजों का बीमा कराना भी मुश्किल हो जाता है। अगर समुद्री मार्ग को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र घोषित कर दिया जाता है तो बीमा कंपनियां जहाजों के लिए कवर देने से बचती हैं या प्रीमियम बहुत ज्यादा बढ़ा देती हैं। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत पर पड़ता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव जल्द खत्म भी हो जाए तो समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में समय लग सकता है। समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने और मार्ग को सुरक्षित घोषित करने की प्रक्रिया जटिल होती है और इसमें कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम पर भारत समेत कई देशों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाला समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक संकट बना रहा तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लेकर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों तक महसूस किया जा सकता है।

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