एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जारी ईरान–इजरायल युद्ध का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय नागरिक इस संकट से प्रभावित हुए हैं। उड़ानें रद्द होने और कई हवाई अड्डों के अस्थायी रूप से बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोग वहां फंसे हुए हैं और अपने घर लौटने के लिए परेशान हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद 1 से 7 मार्च के बीच खाड़ी क्षेत्र से 52 हजार से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया। इनमें से लगभग 32 हजार लोग भारतीय विमानों से और बाकी विदेशी एयरलाइनों के जरिए भारत लौटे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि भारत सरकार पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों से स्थानीय प्रशासन और भारतीय दूतावासों की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
ऑपरेशन के बाद बदले हालात
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान Operation Epic Fury के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर उड़ान सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिसके कारण वहां काम करने, पढ़ने या पर्यटन के लिए गए लोग वापस नहीं आ पा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारत के करीब 90 लाख से अधिक नागरिक रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या मजदूरों, तकनीकी कर्मचारियों, छात्रों और छोटे कारोबारियों की है।
परिवारों में चिंता का माहौल
उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। युद्ध की खबरों के बाद भारत में उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है।
बनारस के रहने वाले दुर्गेश कुमार, जो दुबई की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं, का कहना है कि वे रोजगार के लिए हाल ही में वहां पहुंचे थे, लेकिन अब युद्ध की स्थिति ने सभी को डरा दिया है। उनका कहना है कि काम खत्म होने के बाद लोग सीधे अपने कमरों में लौट जाते हैं और हर समय अनहोनी का डर बना रहता है।
हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में स्थिति सामान्य है। दुबई में रहने वाले गोरखपुर के नीरज निषाद का कहना है कि शुरुआत में डर जरूर था, लेकिन अब रोजमर्रा की जिंदगी काफी हद तक सामान्य है।
छात्रों और धार्मिक यात्रियों की भी चिंता
ईरान के शहर कुम सहित कई इलाकों में पढ़ाई और धार्मिक शिक्षा के लिए गए भारतीय छात्र भी वहां फंसे हुए हैं। कई परिवारों का अपने परिजनों से संपर्क टूट जाने के कारण चिंता और बढ़ गई है।
यात्रा और रोजगार पर भी असर
युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। कई उड़ानों को रद्द कर दिया गया है, जबकि कुछ उड़ानों का किराया अचानक बढ़ गया है। ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार सामान्य दिनों में 17–18 हजार रुपये में मिलने वाला दुबई का टिकट अब 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गया है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत के श्रमिकों, व्यापार, पर्यटन और विमानन क्षेत्र पर और अधिक पड़ सकता है। फिलहाल सरकार की कोशिश है कि वहां मौजूद भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें और जरूरत पड़ने पर उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश वापस लाया जा सके।




