एबीसी नेशनल न्यूज | मुंबई | 13 मार्च 2026
देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती परेशानियों के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस गैस वितरकों की उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि हाल के दिनों में गैस की आपूर्ति में लगातार बाधा आ रही है, जिससे वितरकों और उपभोक्ताओं दोनों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और इज़रायल के बीच संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पर असर पड़ा है और कई जगहों पर गैस की कमी की स्थिति बन गई है। गैस वितरकों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं की मांग पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है और यदि आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में सब कुछ सामान्य है। पवन खेड़ा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर सब कुछ ठीक है तो फिर गैस आपूर्ति को लेकर अदालत तक मामला क्यों पहुंचा।
पवन खेड़ा ने कहा कि आम लोगों को गैस सिलेंडर मिलने में दिक्कत हो रही है और कई इलाकों में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उनके अनुसार सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यह बताना चाहिए कि आखिर एलपीजी आपूर्ति में रुकावट क्यों आ रही है।
उधर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अदालत के नोटिस के बाद अब सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। इस बीच ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है और इसका प्रभाव भारत समेत कई देशों में महसूस किया जा रहा है।
फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट के नोटिस के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार अदालत में क्या जवाब देती है और एलपीजी आपूर्ति की मौजूदा स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




