सुंदरबन में बाघों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है। बाघों के प्राकृतिक आवास में कटौती, बढ़ते समुद्री जलस्तर और मानव घुसपैठ की वजह से ये वन्य जीव अब गांवों की ओर बढ़ने लगे हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में एक बाघ ने दो मछुआरों पर हमला किया जिससे उनमें से एक की मौत हो गई।
WWF और राज्य वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सुंदरबन में प्रतिवर्ष औसतन 35 से अधिक ऐसे टाइगर ह्यूमन कॉन्फ्लिक्ट के मामले सामने आते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी कटाव, बाढ़ और मैंग्रोव की कमी ने बाघों के क्षेत्र को सीमित कर दिया है। वे भोजन की तलाश में अब मानव बस्तियों की ओर आने को मजबूर हैं।
सरकार ने ‘सह-अस्तित्व नीति’ के तहत टाइगर बफर ज़ोन की सीमा बढ़ाने, कैमरा ट्रैप लगाने और लोगों को प्रशिक्षण देने जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन स्थानीय समुदायों का कहना है कि उन्हें आजीविका विकल्प दिए बिना संरक्षित क्षेत्र बढ़ाना उनके खिलाफ अन्याय है।




