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मोदी से फोन वार्ता : नेतन्याहू ने “यहूदियों” के समर्थन के लिए भारत का धन्यवाद दिया

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 3 मार्च 2026

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच Benjamin Netanyahu ने 1 मार्च 2026 को Narendra Modi से लंबी टेलीफोनिक बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय हुई जब Israel, United States और Iran के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज हो रहा है। नेतन्याहू ने इस दौरान ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में इज़राइल और यहूदी समुदाय के समर्थन के लिए भारत और भारतीय जनता का आभार व्यक्त किया।

नेतन्याहू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने “महान मित्र” प्रधानमंत्री मोदी से विस्तृत चर्चा की और इज़राइल के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत को एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण साझेदार बताया। यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है जब 28 फरवरी को इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइल हमले किए। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिति पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने हालिया घटनाओं पर भारत की गहरी चिंता जताई और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। मोदी ने शत्रुता की शीघ्र समाप्ति की अपील करते हुए स्पष्ट किया कि भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवाद सुलझाने का समर्थन करता है। साथ ही, पश्चिम एशिया में कार्यरत लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने की बात कही।

यह बातचीत फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा के तुरंत बाद हुई। उस दौरान उन्होंने Knesset को संबोधित किया था और भारत-इज़राइल संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट भारत की संतुलित विदेश नीति की परीक्षा है। एक ओर इज़राइल के साथ गहरे रणनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान और खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा, व्यापार और सामरिक हित जुड़े हुए हैं। यदि क्षेत्रीय युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका सीधा प्रभाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और प्रवासी भारतीयों पर पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर इस बातचीत को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोगों ने भारत-इज़राइल मित्रता की सराहना की, जबकि कुछ ने इसे भारत की पारंपरिक ‘संतुलित कूटनीति’ से संभावित विचलन के रूप में देखा।

फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति नाजुक बनी हुई है। मिसाइल हमले जारी हैं, अमेरिका की भागीदारी बढ़ रही है और व्यापक युद्ध की आशंका से अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। ऐसे में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पर ही क्षेत्र की स्थिरता और शांति की उम्मीद टिकी हुई है।

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