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पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की उच्च स्तरीय बैठक, निर्यात पर असर की समीक्षा

नई दिल्ली, 3 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने निर्यात पर पड़ रहे असर की समीक्षा के लिए बहु-एजेंसी (मल्टी-एजेंसी) बैठक की। इस बैठक में वाणिज्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, शिपिंग से जुड़े अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और समुद्री मार्गों पर जोखिम की वजह से भारतीय निर्यात किस तरह प्रभावित हो रहा है। खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों की आवाजाही में कमी और बीमा प्रीमियम बढ़ने से व्यापार लागत बढ़ने की आशंका जताई गई है।

निर्यातकों ने सरकार को बताया कि शिपमेंट में देरी, माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी और भुगतान चक्र में अनिश्चितता जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन, इंजीनियरिंग सामान, चावल और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने आश्वासन दिया कि वह स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक समुद्री मार्गों और लॉजिस्टिक सहायता पर विचार किया जाएगा। निर्यातकों को सलाह दी गई है कि वे अपने ऑर्डर, बीमा कवर और शिपमेंट प्लान की समय-समय पर समीक्षा करते रहें।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन हालात पर सतर्क निगरानी जरूरी है। पश्चिम एशिया भारत के लिए तेल आपूर्ति और व्यापार दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में वहां की अस्थिरता का असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यात कारोबार पर पड़ सकता है।

सरकार ने संकेत दिया है कि यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो व्यापार को सहारा देने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल प्राथमिकता आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने और निर्यातकों को भरोसा देने की है।

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