Home » International » ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ “रक्षात्मक” हमलों के लिए सैन्य ठिकाने दिए : कीर स्टारमर

ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ “रक्षात्मक” हमलों के लिए सैन्य ठिकाने दिए : कीर स्टारमर

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | लंदन/नई दिल्ली | 2 मार्च 2026

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने घोषणा की है कि उन्होंने अमेरिका के अनुरोध को स्वीकार करते हुए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है, ताकि अमेरिकी बल ईरान के खिलाफ “रक्षात्मक हमले” कर सकें। सरकार का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में बढ़ते मिसाइल खतरों से निपटने और ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि यह अनुमति सीमित और विशेष उद्देश्यों तक ही सीमित है। स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन किसी व्यापक आक्रामक अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह निर्णय “साझा आत्मरक्षा” (collective self-defence) के सिद्धांत के तहत लिया गया है। उनके अनुसार हाल के दिनों में क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों में वृद्धि से सुरक्षा जोखिम बढ़े हैं।

हालांकि, इस फैसले के बाद राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि “रक्षात्मक हमलों” की परिभाषा व्यवहार में काफी व्यापक हो सकती है। उनका तर्क है कि यदि किसी देश के सैन्य ढांचे पर हमले किए जाते हैं, तो उसे पूर्णतः रक्षात्मक कहना कठिन है। आलोचकों का यह भी कहना है कि इससे अमेरिका और इज़राइल को ईरान पर बहु-दिशात्मक दबाव बनाने में रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

दूसरी ओर, ब्रिटिश सरकार के समर्थकों का कहना है कि यह कदम सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना सहयोगियों के साथ सुरक्षा समन्वय का हिस्सा है। उनका मानना है कि यदि मिसाइल हमलों की आशंका वास्तविक है, तो सहयोगी देशों के बीच आधारभूत सैन्य सहयोग असामान्य नहीं है।

ब्रिटेन के भीतर विपक्षी दलों ने संसद में इस फैसले पर विस्तृत चर्चा की मांग की है। कुछ सांसदों ने आशंका जताई है कि इससे ब्रिटेन अनजाने में बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में उलझ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि हर कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर उठाया गया है।

खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी तनाव के बीच यह निर्णय नई रणनीतिक परत जोड़ता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि “रक्षात्मक सहयोग” किस सीमा तक सीमित रहता है और क्या इससे क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक होता है। फिलहाल, लंदन ने अपनी भूमिका को सीमित और सुरक्षा-आधारित बताते हुए स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की बात कही है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments