[the_ad id="179"]
Home » International » चीनी सैन्य ड्रोन की रहस्यमयी उड़ानें: फर्जी सिग्नल से बनाया दूसरे विमानों का भ्रम

चीनी सैन्य ड्रोन की रहस्यमयी उड़ानें: फर्जी सिग्नल से बनाया दूसरे विमानों का भ्रम

एबीसी नेशनल न्यूज | बीजिंग/दक्षिण चीन सागर | 26 फरवरी 2026

ड्रोन की लगातार उड़ानों से बढ़ी चिंता

दक्षिण चीन सागर के विवादित इलाके में चीन का एक बड़ा सैन्य ड्रोन पिछले कई महीनों से बार-बार उड़ान भरता देखा गया है। इस ड्रोन की गतिविधियों ने आसपास के देशों और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह ड्रोन सामान्य निगरानी मिशन के नाम पर उड़ रहा था, लेकिन इसकी उड़ानों के दौरान कुछ असामान्य तकनीकी संकेत भी मिले, जिससे इसकी वास्तविक पहचान पर सवाल खड़े हुए।

फर्जी सिग्नल से बनाया दूसरे विमानों का भ्रम

ड्रोन ने उड़ान के दौरान ऐसे ट्रांसपोंडर सिग्नल भेजे जिससे रडार पर वह किसी दूसरे विमान जैसा दिखाई दे। कभी यह प्रतिबंधित बेलारूस के कार्गो विमान जैसा लगा तो कभी ब्रिटेन के टाइफून लड़ाकू विमान जैसा दिखा। आसान शब्दों में कहें तो ड्रोन अपनी असली पहचान छिपाकर निगरानी करने की कोशिश कर रहा था, ताकि उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाए और दूसरे देशों की सुरक्षा व्यवस्था भ्रमित हो सके।

चीन की नई रणनीति की झलक

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधि चीन की नई रणनीति का हिस्सा हो सकती है, जिसमें सीधे टकराव से बचते हुए तकनीकी तरीकों से दबाव बनाया जाता है। दक्षिण चीन सागर पहले से ही कई देशों के बीच विवाद का केंद्र है, इसलिए इस तरह की चालें क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञ इसे “ग्रे-ज़ोन” रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं, जहां सैन्य शक्ति का इस्तेमाल खुले युद्ध के बिना किया जाता है।

ताइवान से जुड़े हालात की तैयारी का संकेत

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह गतिविधि भविष्य के किसी संभावित सैन्य हालात, खासकर ताइवान को लेकर, तैयारी का संकेत भी हो सकती है। यदि किसी संघर्ष की स्थिति बनती है तो इस तरह के फर्जी सिग्नल दुश्मन की निगरानी प्रणाली को भ्रमित कर सकते हैं और वास्तविक सैन्य गतिविधियों को छिपाने में मदद कर सकते हैं। इसलिए इस ड्रोन की उड़ानों को केवल सामान्य अभ्यास नहीं बल्कि एक परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

इस घटना के बाद दक्षिण चीन सागर के आसपास के देशों ने अपनी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और सतर्क करने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और पहचान छिपाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ सकता है, जिससे पारंपरिक रडार और निगरानी प्रणाली के सामने नई चुनौतियां खड़ी होंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *