एबीसी नेशनल न्यूज | वॉशिंगटन/तेल अवीव | 25 फरवरी 2026
पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर तनाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक F-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों को इज़राइल के नेगेव रेगिस्तान स्थित ओवदा एयरबेस पर तैनात किया है। इस तैनाती को क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और संभावित सैन्य परिदृश्यों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी हमले की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस कदम ने रणनीतिक हलकों में बहस को तेज कर दिया है।
F-22 की भूमिका को लेकर बढ़ी चर्चा
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार F-22 रैप्टर मुख्य रूप से एयर सुपीरियरिटी और दुश्मन की एयर डिफेंस क्षमता को निष्क्रिय करने के लिए जाना जाता है। यह विमान स्टेल्थ तकनीक, उन्नत सेंसर और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता के कारण दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा तंत्र को कमजोर करने में सक्षम माना जाता है। इसी वजह से इसकी अग्रिम तैनाती को संभावित हवाई अभियानों से पहले की रणनीतिक तैयारी के रूप में भी देखा जाता है।
क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की खबरें
रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि क्षेत्र में विमानवाहक पोत समूहों की मौजूदगी, अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती, हवाई ईंधन टैंकर और निगरानी विमानों की सक्रियता बढ़ी है। इसके साथ ही कुछ देशों द्वारा नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह और दूतावासों की सतर्कता संबंधी कदम उठाए जाने की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि इन गतिविधियों को नियमित सैन्य तैयारी या निवारक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
ईरान की वायु रक्षा पर संभावित फोकस
विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी संभावित सैन्य अभियान की स्थिति बनती है तो शुरुआती चरण में दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करना महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान की एयर डिफेंस क्षमताओं, जिनमें रूसी मूल की प्रणालियाँ भी शामिल बताई जाती हैं, को देखते हुए इस तरह की तैयारी पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सैन्य तैनाती का अर्थ हमेशा तत्काल कार्रवाई नहीं होता और इसे दबाव बनाने या रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार, कूटनीतिक नजरें टिकीं
अब तक अमेरिका या इज़राइल की ओर से किसी संभावित हमले की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। कूटनीतिक हलकों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि क्षेत्रीय तनाव के बीच संवाद और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। फिलहाल सैन्य गतिविधियों को लेकर अटकलें जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े घटनाक्रम का वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।




