एबीसी नेशनल न्यूज | भुवनेश्वर | 25 फरवरी 2026
ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए खनन विभाग के अधिकारी देबब्रत मोहंती को ₹30,000 की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। प्रारंभिक गिरफ्तारी के बाद जब विजिलेंस टीम ने उनके आवास और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से करीब ₹4 करोड़ नकद, भारी मात्रा में सोना और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। बरामदगी ने मामले को एक छोटे रिश्वत प्रकरण से बढ़ाकर बड़े भ्रष्टाचार के शक में बदल दिया है।
अधिकारियों के अनुसार नकदी घर के अलग-अलग हिस्सों—बैग, अलमारी, दराज और छिपे स्थानों—में रखी गई थी। जांच टीम ने इसे हाल के वर्षों में राज्य की बड़ी नकद बरामदगी में से एक बताया है। साथ ही सोने के आभूषण, निवेश और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जिनकी वैधता की जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर ट्रैप ऑपरेशन से शुरू हुई थी, जिसमें अधिकारी को कथित रूप से फाइल क्लियर करने और खनन से जुड़े काम में राहत देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था। गिरफ्तारी के बाद तलाशी में सामने आई संपत्ति ने जांच एजेंसियों को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति (डीए केस) के एंगल से भी जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं।
जांच एजेंसियां अब बरामद नकदी के स्रोत, संभावित अवैध लेनदेन, बैंक खातों, निवेश और अन्य संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। संबंधित ठेकेदारों, कारोबारियों और विभागीय कर्मचारियों से पूछताछ की भी तैयारी है, ताकि संभावित नेटवर्क और मिलीभगत का पता लगाया जा सके।
इस कार्रवाई के बाद राज्य के खनन विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि खनिज संपदा से जुड़े क्षेत्रों में पारदर्शिता और मजबूत निगरानी तंत्र बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां बड़े वित्तीय हित जुड़े होते हैं और भ्रष्टाचार की आशंका अधिक रहती है।
प्रशासनिक हलकों में इस मामले को सरकारी तंत्र में जवाबदेही और सतर्क निगरानी का उदाहरण माना जा रहा है। विजिलेंस विभाग ने संकेत दिए हैं कि जांच के आधार पर आगे और छापेमारी, संपत्ति की जब्ती तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।




